खरीफ धान फसल की कटाई-मिंजाई जोरों पर
इस साल खरीफ धान फसल की कटाई-मिंजाई जोर पकड़ लिया है। दशहरा पर्व मनाने के बाद कटाई-मिंजाई में और तेजी आएगी, क्योंकि अधिकांश किसानों के खेतों में फसल पककर तैयार है। त्यौहार के बीच ही किसान अपने तैयार फसल की कटाई-मिंजाई हार्वेस्टर से मजदूरों से करा रहे हैं, ताकि समय से पहले कार्य पूरा हो सके।
इस साल समय से पहले नवरात्र में ही धान फसल की कटाई-मिंजाई जोर पकड़ लिया है। किसान व मजदूर खेतों में नजर आ रहे हैं। पखवाड़ेभर के भीतर अर्ली वेरायटी के धान फसल की कटाई-मिंजाई पूरी हो जाएगी, क्योंकि अधिकांश किसान धान फसल की कटाई-मिंजाई हार्वेस्टर से करा रहे हैं।
किसानों के लिए इस साल अच्छी बात यह है कि अभी तक बेमौसम बारिश व आंधी-तूफान नहीं होने से अधिकांश किसानों के खेतों में धान फसल खड़ी है और तेजी के साथ कटाई का कार्य हार्वेस्टर से जारी है। मौसम ऐसा ही रहा तो पखवाड़ेभर के भीतर दीवाली पर्व तक अर्ली वेरायटी के धान फसल लेने वाले अधिकांश किसानों के खेतों से फसल की कटाई-मिंजाई पूरी हो जाएगी। लेट वेरायटी के धान फसल की कटाई-मिंजाई ही बचेगा, क्योंकि वर्तमान में यह फसल हरा है। पकने में अभी कम से कम पखवाड़ेभर का समय लगेगा। कटाई-मिंजाई के बाद उत्पादित धान को किसान नमी से बचाने के लिए गांव के गलियों, आंगन और सड़कों पर सूखा रहे हैं, ताकि वे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होते ही बेचने के लिए खरीदी केन्द्र जा सके। क्षेत्र के ग्राम परसतराई, लोहरसी, खरतुली, मुजगहन, पोटियाडीह, रत्नाबांधा, श्यामतराई, खपरी, भानपुरी, देमार, अर्जुनी, शंकरदाह, खरेंगा, कंडेल आदि गांवों में फसल कटाई-मिंजाई जोरों पर है। फसल कटाई-मिंजाई शुरू होने के बाद गांवों के मजदूरों को काम मिलने लगा है। किसान व मजदूर इन दिनों खेतों पर ही व्यस्त है।
खेतों में मजदूरों को काम मिलने के कारण शहर में काम करने आने वाले मजदूरों की संख्या पहले की अपेक्षा कम हो गई है।एक नवंबर से जिले के 100 खरीदी केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू होगी, इसके लिए केन्द्रों में तैयारी शुरू हो गई है। क्योंकि खरीदी शुरू होने में अब सिर्फ एक सप्ताह का समय शेष है। जिला नोडल अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 23 अक्टूबर तक जिले में कुल एक लाख 23808 किसानों का धान बेचने के लिए पंजीयन हो चुका है। जबकि यह पंजीयन जिलेभर के केन्द्रों में 31 अक्टूबर तक चलेगा। इससे संख्या में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।






