यूपी पंचायत चुनाव से पहले बड़ा फैसला, योगी कैबिनेट ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठन को दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को हुई योगी कैबिनेट की अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे अहम पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर “समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति देना रहा।
सरकार के अनुसार, यह आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में गठित किया जा रहा है, ताकि त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार तैयार किया जा सके।
क्यों बनाया जा रहा है आयोग?
राज्य सरकार द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, आयोग का उद्देश्य पंचायत निकायों में पिछड़े वर्गों की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करना है। आयोग पंचायत स्तर पर पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभाव और जनसंख्या के अनुपात का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा।
इसके आधार पर तय किया जाएगा कि किस पंचायत क्षेत्र में OBC आरक्षण कितना और किस प्रकार लागू किया जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 243-घ और उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत की जाएगी।
कितना होगा आरक्षण?
सरकार के नोटिस के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में तय किया जाएगा।
हालांकि, पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल सीटों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तो आयोग सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े जुटा सकेगा।
आयोग में कौन होंगे सदस्य?
जानकारी के अनुसार, आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नियुक्त करेगी। ये सदस्य पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों के जानकार होंगे।
आयोग के अध्यक्ष के रूप में हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया जाएगा। आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह महीने का होगा।
क्यों अहम माना जा रहा है फैसला?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, योगी सरकार पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के लिए नया आधार तैयार करना चाहती है। आयोग पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्गों की वास्तविक भागीदारी का अध्ययन करेगा, जिसके आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
इसे आगामी पंचायत चुनावों से पहले सरकार का बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर एक याचिका के बाद अदालत ने राज्य सरकार को समय पर पंचायत चुनाव कराने और पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने के निर्देश दिए थे।