• May 18, 2026

NEET-UG 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर, CBT मोड में परीक्षा और NTA को हटाने की मांग

NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक विवाद के बाद रद्द किए जाने और दोबारा परीक्षा की नई तारीख घोषित होने के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। इस याचिका में NEET परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की मांग उठाई गई है।

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन द्वारा दाखिल की गई है।

CBT मोड में परीक्षा कराने की मांग

याचिकाकर्ताओं ने NEET-UG की मौजूदा पेन-एंड-पेपर प्रणाली पर सवाल उठाते हुए परीक्षा को तत्काल कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग की है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि 21 जून 2026 को प्रस्तावित री-एग्जाम पारंपरिक ऑफलाइन मोड के बजाय CBT मोड में आयोजित कराया जाए। इसके साथ ही केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को NEET-UG को पूरी तरह डिजिटल परीक्षा प्रणाली में बदलने के लिए एक समयबद्ध रोडमैप तैयार करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

इस रोडमैप में परीक्षा केंद्रों की तकनीकी तैयारी, साइबर सुरक्षा व्यवस्था और सभी अभ्यर्थियों की पहुंच सुनिश्चित करने जैसे पहलुओं को शामिल करने की बात कही गई है।

NTA को हटाने की मांग

याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को हटाकर उसकी जगह एक नई, स्वतंत्र और पारदर्शी “नेशनल एग्जामिनेशन अथॉरिटी” गठित करने की मांग भी की गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई संस्था कानूनी जवाबदेही और न्यायिक निगरानी के तहत काम करे, ताकि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

इसके अलावा, सुप्रीम Court के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, शिक्षाविदों, मनोवैज्ञानिकों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति गठित करने की भी अपील की गई है। यह समिति राष्ट्रीय परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधारों के सुझाव देगी।

सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग

याचिका में राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। साथ ही सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं में एन्क्रिप्टेड डिजिटल पेपर ट्रांसमिशन, बायोमेट्रिक सत्यापन, AI आधारित निगरानी प्रणाली और कड़े साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य करने की अपील की गई है।

याचिकाकर्ताओं का मानना है कि प्रश्नपत्रों की “डिजिटल लॉकिंग” और CBT मॉडल अपनाने से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *