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मप्र विस चुनावः कांग्रेस ने सपा के लिए भी सीट नहीं छोड़ी, आईएनडीआईए के भविष्य पर उठे सवाल

मप्र विस चुनावः कांग्रेस ने सपा के लिए भी सीट नहीं छोड़ी, आईएनडीआईए के भविष्य पर उठे सवाल

– दिग्विजय सिंह बोले- सपा ने चार सीटें मांगी थी, मैंने कमल नाथ की सूची भेजी थी, फिर पता नहीं क्या हुआ

भोपाल, 25 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मनमुटाव खुलकर सामने आ गया है। इससे आईएनडीआईए गठबंधन के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस द्वारा राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए गए और सपा के लिए एक भी सीट नहीं छोड़ी। इसके बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस को धोखेबाज पार्टी तक कह दिया। इस संबंध में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ से पूछा गया तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि ‘छोड़ो अखिलेश-वखिलेश’। इसी बीच मप्र में सीट बंटवारे को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान सामने आया है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कमल नाथ ने क्या कहा, इसके बारे में मुझे नहीं पता, लेकिन किसी के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए। हां, मैं इस बात को स्वीकार कर रहा हू कि कमल नाथ ने अशोक सिंह को मेरे पास दीप नारायण यादव के नेतृत्व वाली टीम के साथ चर्चा के लिए भेजा था। उनके साथ बैठक में हमने चर्चा की थी। सपा का एक उम्मीदवार बिजावर से पिछले चुनाव में जीता था, जो भाजपा में चला गया। दो सीटों पर सपा उम्मीदवार दूसरे नंबर पर थे। सपा छह सीटें मांग रही थी। हमारी चर्चा हुई और हम चार सीटें उनके लिए छोड़ सकते थे, इसकी रिपोर्ट बनाकर मैंने कमल नाथ को भेज दी थी।

उन्होंने आगे कहा कि मैंने केंद्रीय नेतृत्व से भी कार्यसमिति की बैठक में पूछा कि आईएनडीआईए अलायंस के साथ हमारा क्या संबंध होना चाहिए। उन्होंने राज्यों के चुनाव में इसे प्रदेश नेतृत्व पर छोड़ दिया। अब आईएनडीआईए अलायंस लोकसभा चुनाव तो साथ मिलकर लड़ेगा, लेकिन राज्य चुनाव में हमारे मुद्दे अलग हैं।

दिग्विजय सिंह ने अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए कहा कि वह बहुत ईमानदार और समझदार व्यक्ति हैं। वह पढ़े-लिखे हैं और पार्टी और परिवार को संभाल रहे हैं। मुझे नहीं पता कि चर्चा कहां गलत हुई। कमल नाथ पूरी ईमानदारी से किसी समझौते पर पहुंचना चाहते थे, लेकिन गठबंधन में तो दोस्ताना मुकाबले भी हो जाते हैं।

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