90 के दशक के स्कूल बैग की यादें: स्टील टिफिन से लेकर कॉमिक्स तक, मासूमियत से भरा बचपन
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Madhulika- July 6, 2026
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नई दिल्ली: आज के समय में जहां बच्चों के स्कूल बैग में लैपटॉप, टैबलेट और आधुनिक गैजेट्स आम हो गए हैं, वहीं 90 के दशक का स्कूल बैग पूरी तरह अलग दुनिया बयां करता था। उस दौर में बच्चों का बस्ता सिर्फ पढ़ाई की किताबों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें बचपन की मासूम यादें भी भरी होती थीं। 90 के दशक के स्कूल बैग में सबसे खास चीज होती थी स्टील का पेंसिल बॉक्स, जिसे बच्चे बड़े शौक से संभालकर रखते थे। पेंसिल को ब्लेड से छीलना और उसे नुकीले फूल की तरह शेप देना उस समय एक तरह की कला मानी जाती थी। नटराज और अप्सरा जैसी रबड़ बच्चों के लिए बेहद कीमती होती थीं, जो अक्सर दोस्तों के बीच खो भी जाती थीं। इसके अलावा स्टील का टिफिन हर बच्चे की पहचान हुआ करता था। उसमें रखी रोटी, सब्जी या अचार की खुशबू पूरे बैग में फैल जाती थी। लंच ब्रेक में बच्चे एक-दूसरे के टिफिन खोलकर खाना साझा करते थे, जिससे दोस्ती और भी मजबूत हो जाती थी। उस समय किताबों पर अखबार या भूरे कागज का कवर चढ़ाना भी एक जरूरी रूटीन था। बच्चे अपने हाथों से नाम, क्लास और रोल नंबर लिखते थे, और कुछ अपनी किताबों को छोटे-छोटे चित्रों से सजाते भी थे। कई बच्चों के पेंसिल बॉक्स में एक या दो रुपये के सिक्के भी रखे रहते थे, जिन्हें स्कूल के बाद आइसक्रीम, चूरन या खट्टी-मीठी गोलियों पर खर्च किया जाता था। यह छोटी-छोटी खुशियां उस समय के बचपन को और भी खास बनाती थीं। इसके अलावा चंपक जैसी कॉमिक बुक्स भी उस दौर का अहम हिस्सा थीं। बच्चे इन्हें अक्सर घर वालों से छुपाकर स्कूल बैग में ले जाते थे और लंच ब्रेक में दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ते थे। कई बार ये कॉमिक्स टीचर्स से छुपाकर पढ़ी जाती थीं, जो बच्चों के लिए एक रोमांच जैसा होता था। 90 के दशक का यह स्कूल बैग केवल सामान रखने की चीज नहीं था, बल्कि उसमें दोस्ती, मासूमियत और सादगी भरी यादें भी छिपी होती थीं, जो आज भी लोगों के दिलों में ताजा हैं।