• July 7, 2026

मानसून सत्र से पहले स्पीकर ओम बिरला का बड़ा फैसला संभव, TMC और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों पर टिकी नजर

नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में हुई बगावत से जुड़े मामलों पर अहम फैसला ले सकते हैं। दोनों दलों ने अपने बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक आयोजित होगा।

स्पीकर ने शुरू की परामर्श प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और पार्टी से अलग हुए सांसदों के समूह से अलग-अलग मुलाकात कर उनका पक्ष सुना है। इसी तरह की प्रक्रिया शिवसेना (UBT) के मामले में भी अपनाई गई है।

बताया जा रहा है कि लोकसभा सचिवालय के विधि और संवैधानिक विशेषज्ञ इस मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। विशेषज्ञ पूर्व में स्पीकरों द्वारा दिए गए फैसलों और न्यायिक नजीरों का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि कानूनी रूप से मजबूत निर्णय लिया जा सके। माना जा रहा है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस पर अंतिम फैसला आ सकता है।

TMC के 20 सांसदों ने छोड़ी पार्टी

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है। इन सांसदों ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का दावा किया है और लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।

बताया गया है कि बागी समूह ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को समर्थन देने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा भी जताई है। तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद का पहले निधन हो चुका है, जिसके कारण एक सीट फिलहाल रिक्त है।

शिवसेना (UBT) के छह सांसद शिंदे गुट के साथ

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मामले में भी पार्टी के टिकट पर निर्वाचित नौ सांसदों में से छह सांसदों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की है।

इसके बाद शिवसेना (UBT) ने भी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल कर इन सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की है।

दल-बदल कानून पर टिकी नजर

तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) दोनों का तर्क है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से छूट तभी मिल सकती है, जब किसी दल के कम-से-कम दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य एक साथ अलग होकर विलय या विभाजन की प्रक्रिया अपनाएं।

ऐसे में अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय न केवल दोनों दलों के बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि संसद के मानसून सत्र में विभिन्न दलों की संख्या और राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

द्रमुक ने भी की अलग बैठने की व्यवस्था की मांग

इधर, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने भी लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है। यह मांग कांग्रेस द्वारा तमिलनाडु में लंबे समय पुराने गठबंधन को समाप्त कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ गठबंधन करने के बाद सामने आई है।

मानसून सत्र से पहले इन घटनाक्रमों ने संसद की राजनीतिक गतिविधियों को और तेज कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला इन मामलों में क्या दिशा तय करता है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *