BRICS Summit 2026: मायावती ने ‘न्यू डेल्ही डिक्लरेशन’ की तारीफ की, बोलीं- सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 में जारी ‘न्यू डेल्ही डिक्लरेशन’ की तारीफ की है। उन्होंने इसे आपसी सूझबूझ और कूटनीतिक उपलब्धि बताया।
मायावती ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान को लेकर बढ़े तनाव और टैरिफ जैसी आर्थिक चुनौतियों के बीच BRICS देशों का सर्वसम्मति से साझा घोषणा पत्र जारी करना महत्वपूर्ण है।
‘BRICS देशों के बीच संबंध मजबूत करने की इच्छा उम्मीद जगाती है’
मायावती ने कहा कि BRICS सदस्य देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में ‘BRICS करेंसी’ के विकास की पहल भी भविष्य में अहम कदम साबित हो सकती है।
उनके मुताबिक, BRICS देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के प्रयास वैश्विक स्तर पर समूह की भूमिका को और प्रभावी बना सकते हैं।
फिलीस्तीन और आतंकवाद के मुद्दे पर भी बोलीं मायावती
BSP सुप्रीमो ने डिक्लरेशन में फिलीस्तीन के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने Two-State Solution और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलीस्तीन राष्ट्र के समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
मायावती ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने की प्रतिबद्धता को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि इससे आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के दृष्टिकोण को समर्थन मिलता दिखाई देता है।
भारत-चीन रिश्तों पर मायावती ने दी प्रतिक्रिया
मायावती ने भारत और चीन के रिश्तों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने और एक-दूसरे के विकास में साझेदार के रूप में देखने की नीति के परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट होंगे।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का जल्द से जल्द आपसी सहमति से समाधान होना दोनों देशों के लिए बेहतर होगा।
BRICS Summit में भारत-चीन के बीच कई मुद्दों पर सहमति
BRICS Summit 2026 के दौरान भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनने की बात सामने आई है। इनमें दोनों देशों के रिश्तों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से देखने, मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देने और सीमा विवाद के निष्पक्ष एवं स्वीकार्य समाधान की दिशा में प्रयास करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों को लेकर बनी सहमति और मायावती की प्रतिक्रिया ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक महत्व दे दिया है।