• September 14, 2026

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली डिक्लेरेशन को एक्सपर्ट्स ने बताया भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, मतभेदों के बीच साथ आए देश

नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय BRICS सम्मेलन के बाद सदस्य देशों के नेताओं की विदाई शुरू हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अपने-अपने देश लौट चुके हैं। इसी बीच सम्मेलन के नतीजों और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को लेकर विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग देशों के बीच मौजूद जियोपॉलिटिकल मतभेदों और विरोधाभासों के बावजूद साझा घोषणा पर सहमति बनना भारतीय कूटनीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

‘शानदार नतीजा, भारत की डिप्लोमैसी की सफलता’

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स के डीन प्रोफेसर डॉ. श्रीराम चौलिया ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन के नतीजे को भारत की कूटनीति और मल्टीलेटरल एंगेजमेंट के लिहाज से शानदार सफलता बताया।

उनके मुताबिक, BRICS के सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं, लेकिन भारत इन मतभेदों को मैनेज करते हुए सभी देशों को एक साझा न्यूनतम आधार पर लाने में सफल रहा।

BRICS की विविधता को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया

चौलिया ने कहा कि BRICS के विस्तार के साथ यह आशंका थी कि सदस्य देशों के बीच मतभेद और बढ़ सकते हैं। हालांकि, उनके अनुसार भारत ने समूह की विविधता को कमजोरी बनने के बजाय ताकत में बदलने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि जारी युद्धों, जियोपॉलिटिकल तनाव और विवादित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के बीच भी डिक्लेरेशन में सहयोग के लिए साझा आधार तैयार किया गया। उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि दुनिया में बढ़ते ध्रुवीकरण के बावजूद बहुपक्षीय सहयोग की गुंजाइश बनी हुई है।

आतंकवाद और इंटरनेशनल लॉ पर भी चर्चा

यूरोपियन प्रेस फेडरेशन के पत्रकार मार्को एल्पेगियानी ने डिक्लेरेशन में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट रुख की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि आतंकवाद को लेकर वैश्विक स्तर पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

दक्षिण अफ्रीकी पत्रकार ने बताया क्यों जरूरी था डिक्लेरेशन

दक्षिण अफ्रीका के पत्रकार सियाबोंगा गुडमैन माडोंडो ने कहा कि BRICS देशों के लिए साझा डिक्लेरेशन पर पहुंचना जरूरी था। उनके मुताबिक, दस्तावेज में कई ऐसे वैश्विक मुद्दों को शामिल किया गया है, जिनका असर केवल BRICS देशों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने मध्य पूर्व में जारी संघर्षों, वैश्विक स्थिरता और अफ्रीका की सुरक्षा जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि युद्धों का असर दुनिया के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है। इसलिए इन समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

‘डिक्लेरेशन पर अब अमल करने की जरूरत’

माडोंडो ने कहा कि नई दिल्ली डिक्लेरेशन को केवल दस्तावेज तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके बिंदुओं को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने निवेश, आर्थिक विकास, स्थिरता और मानव तस्करी जैसे मुद्दों पर भी काम करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, डिक्लेरेशन को एक ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें उठाए गए कई वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए आगे लगातार प्रयास की आवश्यकता होगी।

पहले अमेरिकी विश्लेषक ने भी बताया था बड़ी डिप्लोमैटिक जीत

इससे पहले अमेरिका के साउथ एशिया एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन ने भी BRICS समिट में जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया था।

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाओं से संकेत मिलता है कि भारत ने BRICS के भीतर मौजूद विविधता और मतभेदों के बीच साझा सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, डिक्लेरेशन में तय लक्ष्यों को जमीन पर लागू करना अब सदस्य देशों के सामने अगली बड़ी चुनौती होगी।

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