• September 14, 2026

Hindi Diwas 2026: ‘मातृभाषा में ही बच्चा भारत को समझ सकता है’, हिंदी दिवस पर अमित शाह ने भाषाई एकता पर दिया जोर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार, 14 सितंबर को हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदी को देश की भाषाई एकता और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ते हुए भारतीय भाषाओं और मातृभाषा के महत्व पर जोर दिया।

अमित शाह ने कहा कि भारत की विविध भाषाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के लिए अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही देश, संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को समझना सहज होता है।

‘वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं’

अमित शाह ने अपने संबोधन में वंदे मातरम् का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं था, बल्कि गुलामी के दौर में भारतीय चेतना को जगाने का प्रयास था।

उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का जिक्र करते हुए कहा कि ‘आनंद मठ’ में लिखा गया यह गीत आगे चलकर पूरे देश में आजादी की भावना का प्रतीक बन गया। शाह के मुताबिक, वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता प्राप्त करने की तीव्र इच्छा को जागृत करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को भी मजबूत किया।

अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद वंदे मातरम् के पूर्ण स्वरूप को स्वीकार करने में भी लंबा समय लगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे फिर से सरकारी समारोहों में गौरव के साथ शामिल करने का काम किया गया।

‘मातृभाषा के बिना भारत को समझना मुश्किल’

अमित शाह ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने विचार-विमर्श के बाद हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने राजभाषा विभाग की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के महत्व की भी बात कही।

उन्होंने कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा के माध्यम से मां का स्नेह, बहन का प्यार, अपनी भूमि, भाषा, परंपराओं, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ता है।

शाह ने कहा कि भाषाओं के बीच विवाद खड़ा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर देने की अपील की।

रवींद्रनाथ टैगोर का किया उल्लेख

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य एक विकसित शतदल कमल की तरह हैं, जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी भारत की प्रादेशिक भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है।

अमित शाह ने कहा कि जिस तरह कमल की किसी एक पंखुड़ी के नष्ट होने से उसकी सुंदरता प्रभावित होती है, उसी तरह किसी भारतीय भाषा का कमजोर होना देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को प्रभावित करता है।

भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की अपील

हिंदी दिवस के मंच से अमित शाह के संबोधन का एक प्रमुख संदेश भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन से जुड़ा रहा। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ देश की प्रादेशिक भाषाओं और मातृभाषाओं के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता को विवाद का कारण बनाने के बजाय इसे देश की ताकत के रूप में देखना चाहिए। भारतीय भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन से देश की सांस्कृतिक चेतना को और मजबूत किया जा सकता है।

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