• May 24, 2026

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में भारी राहत, नई नीति लागू

दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस (IFC) को तर्कसंगत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नई नीति के तहत अब यह शुल्क केवल वास्तविक जल आवश्यकता के आधार पर वसूला जाएगा। पहले पूरे प्रिमाइसेस के आधार पर चार्ज लिया जाता था, लेकिन अब इसे अधिक व्यावहारिक और उपयोग आधारित प्रणाली में बदल दिया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज केवल नए निर्माण या अतिरिक्त निर्माण पर लागू होगा। यदि किसी भवन का पुनर्निर्माण किया जाता है और उसमें जल उपयोग क्षमता में कोई वृद्धि नहीं होती, तो उस स्थिति में दोबारा शुल्क नहीं लिया जाएगा।

दिल्ली सरकार की इस नीति के तहत नॉन-एफएआर और खुले क्षेत्रों को चार्ज में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा E और F श्रेणी की कॉलोनियों को 50 प्रतिशत और G व H श्रेणी की कॉलोनियों को 70 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की गई है। यह शुल्क केवल 200 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड वाली संपत्तियों पर लागू होगा।

नई नीति में अनधिकृत कॉलोनियों के लिए भी राहत दी गई है, जहां पंजीकृत आर्किटेक्ट द्वारा स्वीकृत नक्शों को मान्यता दी जाएगी, जिससे नागरिकों को प्रक्रिया में सरलता मिलेगी।

सरकारी संस्थानों, धार्मिक स्थलों और आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत पंजीकृत संस्थाओं को 50 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी गई है। इसके अलावा जिन संस्थागत और व्यावसायिक परिसरों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम और मानक अनुरूप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हैं, उन्हें सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में 50 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। हालांकि यदि ZLD प्रणाली निष्क्रिय पाई जाती है तो छूट समाप्त कर प्रतिदिन 0.5 प्रतिशत दंड लगाया जाएगा।

सरकार ने उदाहरण देते हुए बताया कि नई नीति के तहत पहले जहां ए और बी श्रेणी में 300 FAR वाली चार मंजिला संपत्ति पर लगभग ₹13.18 लाख शुल्क देना पड़ता था, अब यह घटकर लगभग ₹5.4 लाख रह जाएगा। इसी तरह E और F श्रेणी में यह ₹2.7 लाख और G व H श्रेणी में ₹1.62 लाख तक सीमित हो जाएगा।

औद्योगिक संपत्तियों पर भी बड़ा असर देखने को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर 1000 वर्ग मीटर की औद्योगिक इकाई पर पहले जहां ₹57.67 लाख तक शुल्क लगता था, अब यह घटकर लगभग ₹8.91 लाख रह जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने, प्रक्रिया को सरल बनाने और आम लोगों व उद्योगों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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