साइबोर्ग कॉकरोच अब बनेंगे रेस्क्यू सुपरहीरो, वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का सबसे छोटा डाइविंग सूट
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Madhulika- July 6, 2026
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नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसके तहत कॉकरोच जैसे कीड़ों को आपदा राहत और रेस्क्यू ऑपरेशनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। सिंगापुर और जापान के शोधकर्ताओं ने मिलकर साइबोर्ग कॉकरोचों के लिए दुनिया का सबसे छोटा डाइविंग सूट तैयार किया है, जिससे ये कीड़े पानी के भीतर भी जीवित रहकर काम कर सकेंगे। अब तक इन साइबोर्ग कॉकरोचों का उपयोग मलबे के भीतर फंसे लोगों का पता लगाने के लिए किया जाता था, जिनकी पीठ पर कैमरे, सेंसर और इलेक्ट्रोड्स लगाए जाते हैं। मार्च 2025 में म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के दौरान भी ऐसे कॉकरोचों ने रेस्क्यू टीमों की मदद की थी। हालांकि, पानी या बाढ़ जैसी परिस्थितियों में यह तकनीक सीमित हो जाती थी, क्योंकि कॉकरोच पानी में सांस नहीं ले सकते। इस समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक 3D-प्रिंटेड माइक्रो डाइविंग सूट तैयार किया है। इसमें एक छोटा ऑक्सीजन टैंक, लचीला कवर और सिलिकॉन ट्यूब्स शामिल हैं, जो कॉकरोच के शरीर पर मौजूद श्वसन छिद्रों तक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। यह सिस्टम एक केमिकल रिएक्शन के जरिए ऑक्सीजन उत्पन्न करता है, जिससे कीड़ा पानी के अंदर भी कई घंटों तक जीवित रह सकता है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए मेडागास्कर हिसिंग कॉकरोच का चयन किया है, क्योंकि यह आकार में बड़ा और मजबूत होता है तथा इसके पंख नहीं होते, जिससे इसके शरीर पर उपकरण लगाना आसान हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सूट पूरी तरह से रिमूवेबल है और कीड़े को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाता। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुआ है। शुरुआती परीक्षण नियंत्रित और नकली आपदा स्थितियों में किए जा रहे हैं, ताकि तकनीक को और मजबूत बनाया जा सके। भविष्य में इस तकनीक में GPS सिस्टम जोड़ने की योजना है, जिससे ये साइबोर्ग कॉकरोच बाढ़, भूकंप या अन्य आपदाओं में फंसे लोगों की सटीक लोकेशन बता सकेंगे। इसके अलावा, इसका उपयोग पानी से भरी भूमिगत पाइपलाइनों और सुरंगों में लीकेज ढूंढने के लिए भी किया जा सकता है। वैज्ञानिक अब इस तकनीक को टिड्डियों और बीटल्स जैसे अन्य कीड़ों पर भी आजमाने की तैयारी में हैं, जिससे आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशनों में एक नई क्रांति आने की उम्मीद है।