यूपी में बिजली संकट पर बड़ी कार्रवाई, दो इंजीनियर सस्पेंड, कई अधिकारियों को चेतावनी
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति में बाधा और लापरवाही के मामलों पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। राज्य के बिजली ढांचे से जुड़े दो इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPTCL) के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी द्वारा जारी आदेश के तहत गाजियाबाद और मेरठ में तैनात दो अधिशासी अभियंताओं पर कार्रवाई की गई है। गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता (पारेषण) राहुल और मेरठ के अधिशासी अभियंता (पारेषण) योगेश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही कुछ अन्य अधिकारियों को चेतावनी भी जारी की गई है।
गाजियाबाद क्षेत्र में 18 मई 2026 की रात 220 केवी मुरादनगर–बापूधाम लाइन में तकनीकी खराबी के चलते मधुबन बापूधाम उपकेंद्र की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। जांच में सामने आया कि इससे पहले ही वैकल्पिक लाइन लंबे समय से ब्रेकडाउन में थी, बावजूद इसके कोई बैकअप व्यवस्था नहीं की गई थी। इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की गई।
इसी तरह मेरठ क्षेत्र में 19 और 20 मई 2026 को 132 केवी की कई प्रमुख लाइनों में लगातार ब्रेकडाउन हुए, जिसके कारण कई उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति 22 घंटे तक प्रभावित रही। जांच में पाया गया कि संबंधित अधिकारी समय पर स्थिति की जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दे पाए, जिससे मरम्मत और बहाली में देरी हुई। इसके चलते इंजीनियर योगेश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया।
इसके अलावा कुछ अन्य अभियंताओं को भी ग्रीष्मकालीन निर्देशों का पालन न करने और मरम्मत कार्य में लापरवाही बरतने पर चेतावनी दी गई है। आगरा और मेरठ क्षेत्र के अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया है कि पीक समर सीजन में निर्बाध बिजली आपूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत ऐसी चूक गंभीर मानी जाएगी और आगे और सख्त कार्रवाई की जाएगी।