‘ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्मार्ट पावर का सबसे बड़ा उदाहरण’, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा बयान
भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की “स्मार्ट पावर” का सबसे प्रभावशाली उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि सैन्य सटीकता, सूचना नियंत्रण, कूटनीतिक संदेश और आर्थिक मजबूती का संयुक्त राष्ट्रीय प्रदर्शन था।
सेना प्रमुख के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मन की आतंकी संरचनाओं को गहराई तक जाकर निशाना बनाया और लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक सोच को बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि अभियान को 88 घंटे बाद योजनाबद्ध तरीके से रोका गया, जो भारत की रणनीतिक समझ और संतुलित शक्ति प्रदर्शन को दर्शाता है।
जनरल द्विवेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया है कि भारत जानता है कि कब किस शक्ति का कितना उपयोग करना है और किस तरह सैन्य कार्रवाई को रणनीतिक सफलता में बदला जा सकता है।”
‘दुनिया तेजी से बदल रही है’
सेना प्रमुख ने वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अविश्वास, अस्थिरता तथा बदलते गठबंधन नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक समय माना जाता था कि व्यापार, सप्लाई चेन और डिजिटल कनेक्टिविटी दुनिया को संघर्ष से दूर ले जाएंगे, लेकिन अब यही साधन रणनीतिक दबाव और हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।”
आधुनिक युद्ध में तकनीक की बढ़ती भूमिका
जनरल द्विवेदी ने युद्ध के बदलते स्वरूप पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले नई तकनीकों को लैब से युद्धक्षेत्र तक पहुंचने में दशकों लगते थे, लेकिन अब यह बदलाव कुछ महीनों में देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर टेक्नोलॉजी, क्वांटम सिस्टम, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म, स्पेस टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटेरियल्स भविष्य के युद्ध की दिशा तय करेंगे। उनके मुताबिक भारत को सिर्फ नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वदेशी विकास के जरिए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
‘आत्मनिर्भरता अब राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत’
सेना प्रमुख ने कहा कि आज की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी केवल सैन्य शक्ति की कमी नहीं, बल्कि विदेशी सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिजों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता भी है।
उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता अब सिर्फ आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता बन चुकी है। 21वीं सदी में सुरक्षा और समृद्धि एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।”
अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों के साथ संबोधन समाप्त
अपने संबोधन के अंत में पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के शब्दों को उद्धृत करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा, “शांति, शक्ति की अनुपस्थिति नहीं है। शांति, क्षमता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की उपस्थिति है।”