फिल्म के लिए लिखा गया था ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, कैसे बना देशभर के स्कूलों की सबसे लोकप्रिय प्रार्थना?
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत हैं जो फिल्मों की सीमाओं से निकलकर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए। ऐसा ही एक कालजयी गीत है ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, जिसे स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी भावपूर्ण आवाज दी। आज भी देशभर के हजारों स्कूलों में यह गीत प्रार्थना के रूप में गाया जाता है, जबकि इसे मूल रूप से किसी स्कूल या धार्मिक आयोजन के लिए नहीं, बल्कि एक फिल्म के लिए लिखा गया था। गीतकार भरत व्यास की पुण्यतिथि पर जानते हैं इस अमर रचना के पीछे की कहानी।
‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ वर्ष 1957 में रिलीज हुई क्लासिक फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ का हिस्सा था। फिल्म का निर्देशन और मुख्य भूमिका दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम ने निभाई थी। फिल्म की कहानी एक ऐसे जेलर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपराधियों को केवल सजा देने के बजाय उन्हें सुधारने में विश्वास रखता है। एक भावुक दृश्य में कैदी अपनी गलतियों पर पछतावा व्यक्त करते हुए ईश्वर से सही राह पर चलने की प्रार्थना करते हैं। इसी दृश्य के लिए भरत व्यास ने यह गीत लिखा। संगीतकार वसंत देसाई के मधुर संगीत और लता मंगेशकर की आत्मीय आवाज ने इस गीत को एक अलग ही ऊंचाई दी। समय के साथ इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि देशभर के अनेक स्कूलों ने इसे अपनी दैनिक प्रार्थना के रूप में अपनाया।
राजस्थान के बीकानेर में जन्मे भरत व्यास हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित गीतकारों में गिने जाते हैं। 1950 और 1960 के दशक में उन्होंने कई ऐसे गीत लिखे जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
उनकी चर्चित रचनाओं में शामिल हैं—
बहुत कम लोग जानते हैं कि गीतकार होने के साथ-साथ भरत व्यास ने वर्ष 1949 में ‘रंगीला राजस्थान’ नामक फिल्म का निर्देशन भी किया था।
दशकों बीत जाने के बावजूद ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। इसकी सरल भाषा, मानवीय मूल्यों का संदेश और प्रेरणादायक भाव इसे आज भी बच्चों, शिक्षकों और संगीत प्रेमियों के बीच समान रूप से प्रिय बनाते हैं। यह गीत इस बात का उदाहरण है कि सच्ची भावनाओं और प्रभावशाली शब्दों से रची गई कला समय की सीमाओं से परे जाकर पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखती है।