October 4, 2026

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एनर्जी ड्रिंक पर FSSAI की चेतावनी, बढ़ते सेवन को लेकर सख्ती; सेहत पर गंभीर असर का खतरा

नई दिल्ली: देश में युवाओं और बच्चों के बीच तेजी से बढ़ते एनर्जी ड्रिंक्स के सेवन को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चेतावनी जारी की है। हाल के दिनों में इन पेय पदार्थों के बढ़ते क्रेज को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इनके संभावित खतरों पर चिंता जताई है। FSSAI ने कथित तौर पर रेड बुल, पेप्सिको इंडिया और कैम्पा जैसे बड़े ब्रांड्स को नोटिस जारी कर लेबलिंग में “एनर्जी ड्रिंक” शब्द के उपयोग पर सवाल उठाया है। नियामक का कहना है कि ऐसे लेबल उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।

कैफीन की सीमा और सुरक्षा मानक

FSSAI के पूर्व डायरेक्टर प्रदीप चक्रवर्ती के अनुसार, एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा को लेकर स्पष्ट सीमा तय की गई है। प्रारंभिक विशेषज्ञ समिति ने सुरक्षित सीमा 320 मिलीग्राम प्रति लीटर निर्धारित की थी, जिसे बाद में घटाकर 300 मिलीग्राम प्रति लीटर कर दिया गया। नियमों के तहत यह भी सलाह दी गई है कि एक दिन में 500 मिलीलीटर से अधिक कैफीन युक्त पेय का सेवन न किया जाए। साथ ही गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और संवेदनशील व्यक्तियों को ऐसे पेय से दूर रहने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

कई शोधों के अनुसार, एनर्जी ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इनमें उच्च मात्रा में कैफीन और शुगर होने के कारण हृदय गति बढ़ना, उच्च रक्तचाप और साइनस टैकीकार्डिया जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि इसके सेवन से स्ट्रोक, दौरे पड़ना, किडनी से जुड़ी समस्याएं, डिहाइड्रेशन, पेट की गड़बड़ी, घबराहट और नींद न आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कुछ मामलों में इसके अत्यधिक सेवन को गंभीर हृदय जटिलताओं और दुर्लभ स्थितियों से भी जोड़ा गया है।

लत और आदत बनने का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन और शुगर डोपामाइन को प्रभावित करते हैं, जिससे इनका सेवन आदत और लत का रूप ले सकता है। यही कारण है कि युवा वर्ग में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि एनर्जी ड्रिंक्स अस्थायी उत्तेजना तो दे सकते हैं, लेकिन ये शरीर को वास्तविक पोषण या ऊर्जा नहीं देते और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। FSSAI की यह चेतावनी बढ़ते सेवन को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लोगों को इनके संभावित खतरों के प्रति जागरूक किया जा सके।

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