• July 5, 2026

कमजोर मानसून का असर: देश के 166 बड़े जलाशयों में पानी का भंडारण 39% तक घटा, पूर्वी और पश्चिमी भारत में भी गिरावट

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी रफ्तार का असर अब देश के जल भंडार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कम बारिश के चलते देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का लाइव स्टोरेज पिछले साल की तुलना में काफी घट गया है। सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 जुलाई 2026 तक जलाशयों में उपलब्ध पानी का भंडारण पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 39 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।

166 जलाशयों में पानी का स्तर घटा

सेंट्रल वाटर कमीशन की 2 जुलाई को जारी जलाशय भंडारण बुलेटिन के मुताबिक, देश के 166 बड़े जलाशयों में 2 जुलाई तक कुल 47.725 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) लाइव स्टोरेज उपलब्ध था। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 78.077 BCM था। यानी इस साल जलाशयों में उपलब्ध पानी पिछले साल के मुकाबले केवल 61.13 प्रतिशत रह गया है।

औसत से 27% कम बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 4 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस अवधि में औसतन 196.9 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार केवल 144.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। बारिश की सबसे अधिक कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 41 प्रतिशत कम वर्षा हुई। इसके अलावा मध्य भारत में 23 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 20 प्रतिशत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 15 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई।

दिल्ली में भी आधी से कम बारिश

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मानसून कमजोर रहा। 1 जून से 3 जुलाई के बीच दिल्ली में सामान्य से 49 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में जहां औसतन 75.1 मिमी वर्षा होती है, वहीं इस वर्ष केवल 38.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

क्षेत्रवार जलाशयों की स्थिति

कम वर्षा का सबसे अधिक असर दक्षिण भारत के जलाशयों पर देखने को मिला। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना के 47 बड़े जलाशयों में पानी का लाइव स्टोरेज पिछले साल की तुलना में 33.60 प्रतिशत कम रहा। इसी तरह, पूर्वी भारत के 27 बड़े जलाशयों में पानी का भंडारण 18.01 प्रतिशत और पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में 15.57 प्रतिशत घटा है। उत्तर भारत के पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश स्थित 11 प्रमुख जलाशयों में भी लाइव स्टोरेज पिछले वर्ष के मुकाबले 8.87 प्रतिशत कम दर्ज किया गया।

राहत की उम्मीद

मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब अवदाब (डिप्रेशन) में बदल गया है। इसके अगले 24 घंटों में उत्तर ओडिशा तट से टकराने और फिर उत्तर ओडिशा एवं उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में अच्छी बारिश होती है, तो आने वाले दिनों में जलाशयों के जलस्तर में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।

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