डीजल का नया विकल्प बनेगा आइसोब्यूटेनॉल? नितिन गडकरी बोले- 15% ब्लेंडिंग पर काम जारी
नई दिल्ली: देश में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डीजल के लिए एक नए बायोफ्यूल विकल्प की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता, इसलिए उससे आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) तैयार किया जा रहा है, जिसे भविष्य में डीजल के साथ मिलाने की योजना है। गडकरी ने कहा, “हम डीजल में इथेनॉल नहीं डाल सकते। इसलिए इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल बनाया जा रहा है। यह डीजल का विकल्प बन सकता है और फिलहाल डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर काम चल रहा है।”
यह पहला मौका नहीं है जब गडकरी ने इस योजना का जिक्र किया है। इससे पहले भी उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग की संभावना पर गंभीरता से काम कर रही है।
देश में 2023 से E20 पेट्रोल उपलब्ध है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। अब सरकार डीजल के लिए आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ रही है। पिछले महीने कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा था कि सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता दे रही है और 2026 के अंत तक डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पेट्रोलियम (BPCL) इस तकनीक पर परीक्षण कर रही है और शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं।
आइसोब्यूटेनॉल एक बायो-अल्कोहल है, जिसे इथेनॉल से तैयार किया जाता है। चूंकि इथेनॉल सीधे डीजल में मिश्रित नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे प्रोसेस करके आइसोब्यूटेनॉल बनाया जाता है। इसे गन्ना, अनाज और कृषि अवशेष जैसे बायोमास के फर्मेंटेशन से तैयार किया जा सकता है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के अनुसार, आइसोब्यूटेनॉल डीजल के साथ बेहतर तरीके से मिश्रित हो जाता है। इसका फ्लैश पॉइंट अधिक होता है, जिससे आग लगने का जोखिम कम रहता है, जबकि इसकी वाष्पशीलता (Volatility) भी इथेनॉल की तुलना में कम होती है।
पेट्रोल और डीजल इंजन अलग-अलग तकनीक पर काम करते हैं। पेट्रोल इंजन में ईंधन स्पार्क प्लग की मदद से जलता है, जबकि डीजल इंजन में ईंधन उच्च दबाव (Compression) के कारण स्वयं प्रज्वलित होता है। ऐसी स्थिति में डीजल में सीधे इथेनॉल मिलाने से इंजन की कंबशन टाइमिंग प्रभावित हो सकती है, नॉकिंग (खट-खट की आवाज) की समस्या आ सकती है और खासकर पुराने इंजनों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी वजह से सरकार आइसोब्यूटेनॉल को बेहतर विकल्प के रूप में देख रही है।
E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज और इंजन पर असर की चर्चाओं के बीच अब डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आइसोब्यूटेनॉल की ऊर्जा क्षमता इथेनॉल से अधिक होती है। ऐसे में यदि डीजल में 15 प्रतिशत तक इसका मिश्रण किया जाता है तो माइलेज पर असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव वाहनों की परफॉर्मेंस और इंजन पर कैसा होगा, इसे लेकर परीक्षण अभी जारी हैं। सरकार और तेल कंपनियों के शोध के बाद ही इस ईंधन को व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।