राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को राजभवन स्थित राजराजेश्वर मंदिर में भगवान श्रीशिव का विशेष रुद्राभिषेक किया। उन्होंने राज्य की प्रथम महिला सत्यवती मिश्र सहित परिजनों के साथ देवाधिदेव महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की। राज्यपाल मिश्र ने कहा कि भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है और सावन का पूरा महीना ही भगवान महादेव की आराधना के लिए समर्पित है। उन्होंने इस अवसर पर देश और प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली के लिए […]Read More
बेतिया में बोल बम के जयकारे से गूंजा गंडक
सावन की सोमवारी को जल भरने के लिए गंडक घाटों पर शिव भक्तों की भीड उमड़ पडी । जिले के पिपरा सिगही घाट पर हजारों श्रद्धालु पौ फटते ही जल भरने के लिए पहुंच गये । नागपंचमी व सोमवारी एक दिन होने की वजह से भक्ति की लहर परवान चढने लगी । लोगो से हर शिवालय पटा रहा । वही एक परिधान वाले वस्त्र धारण किए शिव भक्तों से घाट पटा रहा । लोगो के […]Read More
हिन्दू मंदिरों की पुण्यगाथा बताएगा राम मंदिर का संग्रहालय
श्रीराम जन्मभूमि पर निर्माणाधीन भव्य मंदिर आकार लेने लगा है। वहीं देश के अन्य मंदिरों का कायाकल्प करते हुए उन्हें भव्य स्वरूप प्रदान करने का कार्य भी हो रहा है। वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम हो, उज्जैन का महाकाल मंदिर हो या केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, आस्था और विरासत का सम्मान तो हो ही रहा है, सनातन धर्म के गौरव को पुनर्प्रतिष्ठापित करने का महाअभियान भी इसके जरिए तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इसी […]Read More
नर-नारायण भगवान के बदरीपुरी भ्रमण के साथ हुआ नर-नारायण महोत्सव
शुद्ध श्रावण मास के हस्त नक्षत्र के शुभ मुहूर्त पर श्री बदरीनाथ धाम में दो-दिवसीय नर-नारायण महोत्सव का बदरीपुरी भ्रमण और नर-नारायण के अभिषेक के पश्चात हुआ। सोमवार को पूर्वाह्न दस बजे बदरीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के पश्चात भगवान श्री नर-नारायण की देवडोली भक्तों को आशीष देने बदरीपुरी के भ्रमण पर निकली। भ्रमण के बाद नर-नारायण महोत्सव हो गया। भ्रमण के दौरान बामणी तथा संपूर्ण बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं ने नर-नारायण की देवडोली के दर्शन […]Read More
नागपंचमी का त्यौहार नाग रक्षा का संदेश देता है। वेद एवं पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना गया है। नागपंचमी के कथा के श्रवण का बड़ा महत्व है। इस कथा के वाचक सुमंत मुनि एवं श्रोता पाण्डन वंश के राजा शतानीक थे। एक बार देवताओं तथा असुरों में समुद्र मंथन द्वारा 14 रत्नों में उच्चैरू श्रवा नामक अश्व रत्न प्राप्त हुआ। यह अश्व अत्यन्त श्वेत वर्ण का था। […]Read More






