• July 10, 2026

बिहार में 3,000 से अधिक फर्जी शिक्षकों पर गिरेगी गाज, नौकरी से बर्खास्तगी के साथ वेतन-ब्याज की होगी वसूली

पटना: बिहार सरकार ने फर्जी डिग्री और नकली शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। जांच में 3,000 से अधिक ऐसे शिक्षक सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिए नियुक्तियां प्राप्त की थीं। अब इन सभी शिक्षकों को बर्खास्त करने के साथ-साथ उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

सतर्कता जांच में सामने आईं अनियमितताएं

शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह कार्रवाई राज्य सतर्कता ब्यूरो की उस विस्तृत जांच के बाद की जा रही है, जिसमें वर्ष 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक भर्तियों की पड़ताल की गई थी।

उन्होंने कहा, “जांच में फर्जी डिग्री, जाली शैक्षणिक प्रमाण पत्र और फर्जी शिक्षण संस्थानों से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं। 3,000 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाएगा।”

कई शिक्षकों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर कई शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और उन्हें आरोपी बनाया गया है। सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

मिथिलेश तिवारी ने कहा, “केंद्र और राज्य की एनडीए सरकारें भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम करती हैं। इस मामले की सतर्कता जांच का आदेश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही दिया था।”

वेतन और मानदेय की भी होगी वसूली

शिक्षा विभाग अब इन शिक्षकों से नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन, मानदेय और उस पर लगने वाले ब्याज की भी वसूली करेगा।

जांच एजेंसियों ने पाया कि कई उम्मीदवारों ने फर्जी कॉलेजों से जारी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया, जबकि कुछ ने जाली शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर शिक्षकों के पद हासिल किए।

इस्तीफा देने वालों पर भी होगी कार्रवाई

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ शिक्षकों ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस्तीफा देने वाले शिक्षकों को भी राहत नहीं मिलेगी और उनके खिलाफ कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।

बिहार सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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