एथेनॉल वाले पेट्रोल पर भ्रामक वीडियो का मामला: नागपुर साइबर पुलिस ने 4 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर दर्ज किया केस
भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वजह से वाहनों में तकनीकी खराबियां आ रही हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक बताया है। अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
महाराष्ट्र के नागपुर में साइबर पुलिस ने एथेनॉल नीति और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान को लेकर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई नागपुर बीजेपी सोशल मीडिया सेल की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई है।
पुलिस के अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनमें बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप के अलावा देसी ब्राइट, हर्षिता राठी और अंकलेश इन्वाते शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने अपने वीडियो में नितिन गडकरी की एथेनॉल नीति का संदर्भ देकर उसका गलत अर्थ प्रस्तुत किया, लोगों के इंटरव्यू के जरिए उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की और समाज में भ्रम एवं अशांति फैलाने का प्रयास किया।
मामले पर नागपुर के सह पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी ने बताया कि आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित वीडियो का सत्यापन किया जा रहा है और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
रेड्डी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और टिप्पणियों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और एथेनॉल नीति को लेकर आपत्तिजनक तथा भ्रामक बातें सामने आई हैं। साथ ही कुछ अश्लील टिप्पणियों के संबंध में भी आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है। चूंकि आरोपी अलग-अलग राज्यों से हैं, इसलिए मामले की जांच विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी है और इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा तथा आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता चुकी है।