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टीएमसी में बढ़ी बगावत! बागी गुट ने अनुब्रत मंडल को बनाया बीरभूम अध्यक्ष, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी घमासान के बीच पार्टी के बागी गुट ने बड़ा कदम उठाया है। विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी की अगुवाई में हुई बैठक में विभिन्न जिलों के नए अध्यक्षों की घोषणा की गई, जिसमें सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले अनुब्रत मंडल का रहा। बागी गुट ने अनुब्रत मंडल को बीरभूम जिले का अध्यक्ष नियुक्त करने का ऐलान किया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब टीएमसी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं तेज हैं। बागी गुट का दावा है कि आने वाले दिनों में कई और विधायक और नेता उनके साथ जुड़ सकते हैं।

अनुब्रत मंडल को मिली नई जिम्मेदारी

बैठक के बाद रीताब्रत बनर्जी ने विभिन्न जिलों के नए अध्यक्षों के नामों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रसून बनर्जी को मालदा, देबाशीष कुमार को दक्षिण कोलकाता, संदीपन साहा को उत्तरी कोलकाता और अनुब्रत मंडल को बीरभूम जिले का अध्यक्ष बनाया गया है।

रीताब्रत बनर्जी ने कहा कि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए पुराने नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को भी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में और कई नेता उनके खेमे में शामिल होंगे।

“अनुब्रत से 30 बार बात हुई”

पत्रकारों से बातचीत में रीताब्रत बनर्जी ने दावा किया कि 4 मई से अब तक उनकी अनुब्रत मंडल से कम से कम 30 बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

बैठक में मौजूद तृणमूल के एक अन्य बागी विधायक अक्रूज्जमान ने भी कहा, “बस एक दिन और इंतजार कीजिए, सब कुछ साफ हो जाएगा।”

अनुब्रत मंडल ने साधी चुप्पी

हालांकि, बागी गुट द्वारा बीरभूम जिला अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद भी अनुब्रत मंडल ने इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जब मीडिया ने उनसे इस संबंध में सवाल पूछे, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अनुब्रत मंडल वास्तव में बागी गुट के साथ आते हैं, तो यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। बीरभूम में अनुब्रत मंडल की मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है और उनका रुख आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

फिलहाल, टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बागी गुट की गतिविधियों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

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