• July 14, 2026

मध्य प्रदेश में UCC लागू होने की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने सीएम मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यूसीसी के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। मुख्यमंत्री ने तय समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति की अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया मौजूद रहे। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेस को यूसीसी के मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने लाना चाहिए।

तीन खंडों में तैयार की गई रिपोर्ट

मुख्यमंत्री को सौंपी गई समिति की रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है।

पहला खंड समिति की अनुशंसाओं से संबंधित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रचलित विभिन्न कानूनों और परंपराओं का अध्ययन और विश्लेषण करते हुए सुझाव दिए गए हैं। इस खंड में कुल 10 अध्याय शामिल हैं।

दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप के रूप में तैयार किया गया है। समिति ने मध्य प्रदेश में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखते हुए यह मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।

तीसरा खंड जन-परामर्श रिपोर्ट का है, जिसमें जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सुझावों का विस्तृत विवरण दिया गया है। समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव और परामर्श प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण इस रिपोर्ट में शामिल किया गया है।

समिति ने अपनी सिफारिशों में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है।

विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर किया अध्ययन

राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों पर प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

समिति ने मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया है। रिपोर्ट में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, पारंपरिक रीति-रिवाजों का सम्मान करने और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समिति की अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर का भी आभार व्यक्त किया, जो व्यक्तिगत कारणों से इस अवसर पर उपस्थित नहीं हो सके।

विधि विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट

समिति द्वारा तैयार प्रतिवेदन राज्य सरकार के विधि विभाग को सौंप दिया गया है। अब विधेयक में आवश्यक संशोधन और वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलने के बाद यूसीसी विधेयक को राज्य विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

कांग्रेस से जवाब मांगते दिखे मुख्यमंत्री

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अब कांग्रेस को यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “चाहे समान नागरिक संहिता का मुद्दा हो या भोजशाला का, कांग्रेस हर विषय को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से देखती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सकारात्मक बात यह है कि सभी धर्मों के लोगों ने यूसीसी पर खुलकर अपनी राय रखी है, लेकिन कांग्रेस ने अब तक इस विषय पर अपना स्पष्ट मत सामने नहीं रखा है।

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