• April 9, 2026

नागपुर में RSS घोष पथक के हस्तलिखित इतिहास का लोकार्पण, मोहन भागवत ने दिए विचार

Rashtriya Swayamsevak Sangh के नागपुर महानगर घोष पथक के इतिहास को हस्तलिखित रूप में संकलित कर गुरुवार को इसका लोकार्पण किया गया। यह कार्यक्रम Dr. Hedgewar Smriti Mandir परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें संघ प्रमुख Mohan Bhagwat मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

यह हस्तलिखित दस्तावेज नागपुर महानगर घोष पथक के इतिहास, उसकी शुरुआत, गतिविधियों और घोष वादन की परंपराओं व पद्धतियों को विस्तार से प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम के दौरान घोष वादकों ने विभिन्न प्रस्तुतियां और प्रात्यक्षिक भी दिए।

इतिहास और पुराण पर विचार

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि कहानियों के दो प्रकार होते हैं—इतिहास और पुराण। इतिहास तथ्यों पर आधारित होता है, जबकि पुराणों में कई प्रेरक और उद्बोधक कथाएं जुड़ी होती हैं, चाहे वे पूरी तरह तथ्यात्मक हों या नहीं।

स्वयंसेवकों के योगदान पर जोर

भागवत ने कहा कि संघ का पूरा कार्य स्वयंसेवकों के परिश्रम से खड़ा हुआ है और यह किसी बाहरी कृपा पर निर्भर नहीं रहा। उन्होंने कहा कि संघ आज एक ऐसी शक्ति के रूप में खड़ा है, जो देश को दिशा देने का काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ में किए जाने वाले सभी कार्य संस्कार निर्माण के उद्देश्य से होते हैं और संगठन अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज को श्रेय देने में विश्वास रखता है।

संगठन और अनुशासन का महत्व

भागवत ने समाज को संगठित करने पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को एकजुट होकर चलने और कार्य करने का अभ्यास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शारीरिक अनुशासन का प्रभाव मन पर पड़ता है और यह एक वैज्ञानिक सत्य है।

गौहत्या पर हालिया बयान

हाल ही में Mohan Bhagwat ने Vrindavan में एक कार्यक्रम के दौरान गौहत्या पर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता के माध्यम से देश में गौहत्या को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह Ayodhya में राम मंदिर के लिए देश में भावना बनी थी, उसी तरह का समर्पण गायों के संरक्षण के लिए भी जरूरी है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *