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खालिस्तान समर्थकों से लोहा लेते हैं गुरुदेव निडर सिंह निहंग

भारतीय शस्त्र विद्या में पारंगत और लंदन में जन्मे गुरुदेव निडर सिंह निहंग ब्रिटेन और कनाडा में अकसर खालिस्तान समर्थकों से लोहा लेने पर सुर्खियों में रहते हैं। वह साफ कहते हैं कि खालिस्तानी समर्थक मूर्ख हैं। भारत में इनके मंसूबे कभी पूरे नहीं हो सकते। छह फुट एक इंच लंबे 57 वर्षीय गुरुदेव में युवाओं जैसा जोश है। वह इन दिनों युवाओं को शस्त्र विद्या का ज्ञान देने के लिए भारत में हैं। वह गोवा, गुजरात आदि राज्यों में शिविर लगाने के बाद दिल्ली-एनसीआर आए हैं। इस दौरान गाजियाबाद के बैटलफील फाइट क्लब में ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से उनकी भारत के मौजूदा परिदृश्य पर चर्चा हुई।

बातचीत में गुरुदेव कभी अपने लक्ष्य से नहीं भटकते। उन्होंने अपना जीवन शस्त्र विद्या का ज्ञान बांटने को लेकर समर्पित कर दिया है। वह कहते हैं कि अगर यह विद्या लुप्त हो गई तो दुनिया खासतौर पर भारत को बहुत बड़ी क्षति होगी। वह चाहे जापान की शस्त्र विद्या हो। चाहे चीन की शस्त्र विद्या हो और चाहे आधुनिकतम मार्शल आर्ट। सबका मूल आधार भारतीय शस्त्र विद्या है। यह स्व रक्षा के लिए बेहतर विकल्प है। यह आत्मरक्षा के लिए सबसे बड़ा साधन है। यह जंगी विद्या भी है। शस्त्र संचालन के ज्ञान से परिपूर्ण निहत्था योद्धा हथियारों से लैस दुश्मन को धूल चटाने में सक्षम होता है।

वह उदाहरण देते हैं। कहते हैं, अमृतसर का चौरासी के कई बरस बाद का वाकया है। तब भी वहां की फिजा में खालिस्तान का नारा गूंज रहा था। वह विरोध करने वहां पहुंच गए। स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने पहुंचे तो वहां ऐसे ही लोगों से सामना हो गया। वह निहत्थे होते हुए भी अकेले भिड़ गए। आखिर में उन सबको भागना पड़ा। गुरुदेव निडर सिंह का कहना है कि आज का भारत बहुत बदल गया है। वह सक्षम भारत है। वह अपनी आत्मरक्षा के लिए स्वाभिमान से भरा हुआ है। ऐसा राष्ट्र कभी किसी से नहीं डरता। आज का भारत अगर अपनी सनातनी शस्त्र विद्या से पारंगत हो जाए तो वह विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र होगा। बच्चा-बच्चा वीर होगा। घर-घर जांबाज होगा। तब कोई भी आंख तरेरने की हिम्मत नहीं करेगा।

ब्रिटिश नागरिक गुरुदेव निडर सिंह निहंग अब हर साल भारत आते हैं। महीने-दो चार महीने रहते हैं। इस दौरान किशोर और युवा पीढ़ी को शस्त्र चलाने के गुर सिखाते हैं। लंदन में पले-बढ़े और पढ़े गुरुदेव दुनिया के कई देशों के सैनिकों को इस विद्या का प्रशिक्षण दे चुके हैं। वह कहते हैं कि टेक्सेस रेंजर (पुलिस) के जवानों ने तो इसमें काफी दिलचस्पी ली। कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और इंग्लैंड में लोग अब इस विद्या को जानने-समझने-सीखने में दिलचस्पी लेने लगे हैं।

गुरुदेव निडर सिंह का कहना है कि इस भारतीय शस्त्र विद्या पर अंग्रेजों ने पाबंदी लगाई थी। अंग्रेजों ने पंजाब में 1849 से लगातार 11 साल तक इस विद्या को जोर-जुल्म से दबाने का प्रयास किया। पिंड, कस्बा और शहर में गतका खेलों पर पाबंदी लगा दी। अंग्रेजों का मकसद था कि यह लोग पारंपरिक स्व रक्षा के तौर-तरीके भूल जाएं, जिससे इनको आसानी से दबाया जा सके। अंग्रेजों ने ऐसा भारत के हर राज्य में किया। बावजूद इसके कुछ जानकार लोग इस विद्या का चोरी-छुपे अभ्यास करते रहे, जिससे वह जिंदा रही। आत्म रक्षार्थ अद्वैत विद्या सबसे अच्छी है।

वह कहते हैं,-”यह सांस्कृतिक अभियान है। बच्चों और युवाओं को शुरू से ही इस अभियान से जुड़ना चाहिए। इसमें जब वो पारंगत हो जाएं तो आगे का लक्ष्य तय कर करें।” गुरुदेव कहते हैं कि यह सुखद है कि इस विद्या के प्रति ग्लोबल अवेयरनेस बढ़ी है। भारत का युवा भी तेजी से इसे सीखने में रुचि दिखा रहा है। बातचीत में उन्होंने अपने बूढ़ा दल के गुरु अकाली निहंग बाबा मोहिंदर सिंह का स्मरण भी किया। कहते हैं,” मैं 1984 में माता-पिता के साथ लंदन से अपने पुश्तैनी पिंड शादीपुर (जालंंधर) आया था। यहीं बाबा मोहिंदर सिंह से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे सनातन शस्त्र विद्या का ज्ञान देने के लिए चुना। जब पांच-छह साल में मैं पारंगत हो गया तो बोले सारे दुनिया में यह ज्ञान फैलाना। अपना सारा जीवन इसी में खपा देना।”

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