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बीएमसी मतगणना के बीच महाराष्ट्र में सियासी घमासान: पुलिस लाठीचार्ज पर भड़के मंत्री, राहुल गांधी के बयान पर भाजपा का ‘टूलकिट’ प्रहार

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के भाग्य का फैसला करने के लिए शुक्रवार को जब मतगणना की प्रक्रिया शुरू हुई, तो किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि यह दिन केवल जीत-हार के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। मतगणना केंद्रों से आ रहे रुझानों के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोपों का एक ऐसा तूफान उठा, जिसने चुनावी माहौल को पूरी तरह से तनावपूर्ण बना दिया। एक तरफ जहां छत्रपति संभाजीनगर के मतगणना केंद्र पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प और लाठीचार्ज की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया पर उठाए गए संदेह ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई जुबानी जंग छेड़ दी है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा बीएमसी में ऐतिहासिक बढ़त की ओर बढ़ती दिख रही है और ठाकरे परिवार का दशकों पुराना किला ढहने की कगार पर है। इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच हुई हिंसा और बयानबाजी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि वर्चस्व की एक गहरी लड़ाई बन चुका है। शुक्रवार का पूरा दिन हंगामे, पुलिस कार्रवाई और तीखी बयानबाजी के नाम रहा, जिससे लोकतंत्र के इस उत्सव पर विवादों का साया मंडराने लगा।

मतगणना केंद्र पर बवाल: पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष

घटनाक्रम की शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर से हुई, जहां सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज को एक प्रमुख मतगणना केंद्र बनाया गया था। शुक्रवार की सुबह जब विभिन्न दलों के कार्यकर्ता अपने उम्मीदवारों की जीत की उम्मीद में केंद्र के बाहर जमा होने लगे, तभी सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश को लेकर विवाद छिड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मतगणना केंद्र के भीतर प्रवेश करने की कोशिश कर रहे शिवसेना कार्यकर्ताओं और वहां तैनात पुलिस बल के बीच तीखी कहासुनी हुई। देखते ही देखते यह बहस धक्का-मुक्की में बदल गई और स्थिति अनियंत्रित हो गई।

पुलिस का दावा है कि भीड़ को नियंत्रित करने और चुनाव आयोग के सुरक्षा घेरे को टूटने से बचाने के लिए उन्हें बल प्रयोग करना पड़ा। हालांकि, वहां मौजूद कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई में कई राजनीतिक कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। लाठीचार्ज की खबर फैलते ही मतगणना केंद्र पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और समर्थकों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस घटना ने कुछ समय के लिए मतगणना की शांतिपूर्ण प्रक्रिया में भी व्यवधान डाला, जिसे बाद में अतिरिक्त बल बुलाकर बहाल किया गया।

मंत्री संजय शिरसाट का आक्रोश: पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

मतगणना केंद्र पर हुई इस हिंसा ने सत्ता पक्ष के भीतर भी असंतोष पैदा कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पुलिस विभाग को आड़े हाथों लिया। मीडिया से बात करते हुए शिरसाट ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पुलिस पर शक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान और मतगणना जैसे महत्वपूर्ण दिनों पर कार्यकर्ता उत्साह में होते हैं, लेकिन उन पर लाठियां भांजना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

मंत्री शिरसाट ने स्पष्ट लहजे में कहा कि पुलिस को अपनी सख्ती अपराधियों और कानून तोड़ने वालों पर दिखानी चाहिए, न कि उन कार्यकर्ताओं पर जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी पार्टी का समर्थन करने आए हैं। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल लीगल केस (MLC) दर्ज कराने की बात कही है और मांग की है कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। मंत्री के इस कड़े रुख ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है, क्योंकि यह मामला अब सीधे तौर पर सरकार बनाम पुलिस की शक्ल लेता दिख रहा है।

पुलिस प्रशासन की सफाई और निष्पक्ष जांच का आश्वासन

बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पुलिस विभाग ने भी अपना पक्ष रखा है। पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि मतगणना केंद्र की सुरक्षा के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अत्यंत कड़े दिशा-निर्देश होते हैं। केंद्र के भीतर केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति थी। जब भीड़ ने सुरक्षा घेरा तोड़कर जबरन भीतर घुसने का प्रयास किया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

पुलिस आयुक्त ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि इस पूरे घटनाक्रम और लाठीचार्ज की परिस्थितियों की जांच उप पुलिस आयुक्त (DCP) स्तर के अधिकारी करेंगे। पवार ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या वास्तव में बल प्रयोग आवश्यक था या नहीं। फिलहाल, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मतगणना केंद्रों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को चौगुना कर दिया गया है और वरिष्ठ अधिकारी खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

राहुल गांधी का चुनावी प्रक्रिया पर संदेह और लोकतंत्र का सवाल

एक तरफ महाराष्ट्र की सड़कों पर संघर्ष चल रहा था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बयान जारी कर इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर हवा दे दी। राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा प्रणाली में जनता का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत बताया और आरोप लगाया कि चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया जब शुरुआती रुझान कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लिए उत्साहजनक नहीं थे।

राहुल गांधी के इस बयान को विपक्षी दलों द्वारा चुनावी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उनके समर्थकों का तर्क है कि बार-बार उठने वाले संदेहों का समाधान किया जाना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र की पवित्रता बनी रहे। हालांकि, इस बयान ने उन संस्थानों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है जो निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

भाजपा का ‘टूलकिट’ पलटवार: हार से ध्यान भटकाने का आरोप

राहुल गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए तत्काल पलटवार किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने राहुल गांधी के आरोपों को कांग्रेस की एक ‘नाकाम टूलकिट’ करार दिया। केसवन ने तंज कसते हुए कहा कि जब भी कांग्रेस चुनाव हारती है या उसके प्रदर्शन में गिरावट आती है, तो वह संस्थानों और चुनावी प्रक्रिया पर दोष मढ़ना शुरू कर देती है। भाजपा ने इसे हार की हताशा से पैदा हुआ बयान बताया।

भाजपा प्रवक्ता ने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों और बीएमसी में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को छिपाने के लिए राहुल गांधी ने यह ‘विक्टिम कार्ड’ खेला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी तक खतरे में रहता है जब तक कांग्रेस सत्ता से बाहर रहती है, और जैसे ही वे कहीं चुनाव जीतते हैं, वही प्रक्रिया उनके लिए पवित्र हो जाती है। भाजपा का यह तीखा हमला दर्शाता है कि बीएमसी चुनाव के नतीजे केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका असर आगामी राष्ट्रीय विमर्श पर भी पड़ेगा।

निष्कर्ष: तनावपूर्ण शांति के बीच नतीजों का इंतजार

शुक्रवार का दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक ऐसा अध्याय बन गया है जहां प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक महत्वाकांक्षा और राष्ट्रीय विवाद एक साथ गुंथ गए। मतगणना केंद्रों पर पुलिस की चौकसी और कार्यकर्ताओं का जोश एक तरफ है, तो दूसरी तरफ बड़े नेताओं के बीच चल रहा शब्द-युद्ध माहौल को और भी गंभीर बना रहा है। बीएमसी के ये चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की सत्ता का केंद्र कौन होगा, लेकिन फिलहाल विवादों और लाठीचार्ज की इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं।

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