JP नेताओं की जमानत सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट को धमकी देने का आरोप, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की NCR
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर सुनवाई के दौरान एक मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने रविवार को इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब CJP ने अपने दोनों नेताओं की रिहाई में देरी का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि जमानत से संबंधित चार जमानतदारों की गारंटी अस्पष्ट कारणों के आधार पर खारिज कर दी गई। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जमानत की सुनवाई में देरी का आरोप
CJP के विधि प्रकोष्ठ की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सुनवाई में कथित देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि वह सुबह 11 बजे से थाने में मौजूद थीं और सुनवाई दोपहर 12 बजे निर्धारित थी, लेकिन शाम 4 बजकर 42 मिनट तक सहायक पुलिस आयुक्त मंदिर मार्ग थाने नहीं पहुंचे थे।
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों पर जंतर-मंतर के बंद फाटकों को पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने का आरोप है। बताया गया है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों की अधिसूचित सूची से हटा दिया गया है।
SEM को धमकी भरा संदेश मिलने का दावा
रत्ना सिंह के मुताबिक, बाद में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने उन्हें बताया कि किसी ने उन्हें धमकी भरा संदेश भेजा है। सिंह ने सरकारी वकील की अनुपस्थिति और सुनवाई के दौरान हुए घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, “सरकारी वकील चार दिन तक नहीं आए। पांचवें दिन आए भी, तो मामले पर बात नहीं करना चाहते थे। वह किसी को रिहा नहीं करना चाहते थे।”
रत्ना सिंह ने आगे दावा किया कि SEM ने उन्हें धमकी भरे संदेश की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, CJP के वकीलों ने कहा कि यदि मजिस्ट्रेट को धमकी मिली है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कथित संदेश भेजने वाले का नंबर आदेश में दर्ज करने और उसकी पहचान बताने की मांग भी की।
CJP के वकीलों ने उठाए सवाल
रत्ना सिंह ने दावा किया कि जमानत सुनवाई के दौरान पार्टी के वकीलों ने सरकारी पक्ष की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मजिस्ट्रेट को धमकी दी गई थी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय जमानत मामले की सुनवाई क्यों प्रभावित हो रही थी।
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ NCR दर्ज की है। धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। CJP की ओर से लगाए गए जमानत प्रक्रिया में देरी के आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
