‘रिमझिम गिरे सावन’ की दिलचस्प कहानी: मुंबई की असली बारिश में फिल्माया गया था बॉलीवुड का यह सदाबहार गीत
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RIYA
- June 4, 2026
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मुंबई। हिंदी सिनेमा में बारिश पर आधारित कई यादगार गीत बने हैं, लेकिन ‘रिमझिम गिरे सावन’ का जादू आज भी बरकरार है। वर्ष 1979 में रिलीज हुई फिल्म मंजिल का यह गीत न केवल अपने मधुर संगीत और भावपूर्ण बोलों के लिए जाना जाता है, बल्कि इसकी नैचुरल शूटिंग और खूबसूरत प्रस्तुति ने भी इसे कालजयी बना दिया। मानसून का मौसम आते ही यह गीत आज भी लाखों लोगों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा बन जाता है।
फिल्म मंजिल के लिए संगीत तैयार करते समय संगीतकार आर.डी. बर्मन ने किसी भारी-भरकम ऑर्केस्ट्रा के बजाय एक ऐसी धुन बनाने पर ध्यान दिया, जो बारिश की फुहारों की तरह सहज और सुकूनभरी महसूस हो। उनकी रचना में सादगी और मधुरता का ऐसा मेल था, जिसने इस गीत को अलग पहचान दी। गीत सुनते समय ऐसा महसूस होता है मानो बारिश की बूंदें खुद कोई मधुर धुन गुनगुना रही हों।
इस गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार योगेश ने लिखे थे। उनकी लेखनी की खासियत थी कि वे सरल और आम बोलचाल की भाषा में गहरी भावनाओं को व्यक्त कर देते थे। ‘सुलग-सुलग जाए मन’ जैसी पंक्तियां प्रेम और बारिश के मौसम के एहसास को बेहद खूबसूरती से सामने लाती हैं। यही वजह है कि यह गीत दर्शकों के दिलों से सीधे जुड़ गया और पीढ़ियों तक पसंद किया जाता रहा।
मुंबई की असली बारिश बनी गीत की सबसे बड़ी खासियत
‘रिमझिम गिरे सावन’ की लोकप्रियता के पीछे इसकी शूटिंग की कहानी भी उतनी ही खास है। निर्देशक बासु चटर्जी ने इस गीत को स्टूडियो में कृत्रिम बारिश के बीच फिल्माने के बजाय मुंबई की वास्तविक बारिश और शहर की असली लोकेशनों पर शूट करने का फैसला किया। गाने में अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी को मुंबई की भीगी सड़कों और मरीन ड्राइव जैसे प्रसिद्ध स्थानों पर फिल्माया गया।
असली बारिश में शूट किए जाने के कारण गीत में एक स्वाभाविक और जीवंत एहसास नजर आता है। दर्शकों को यह किसी फिल्मी दृश्य से ज्यादा दो लोगों के जीवन का एक खूबसूरत और सच्चा पल लगता है। यही नैचुरल अंदाज आगे चलकर इस गीत की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
दो वर्जन, दोनों बने सुपरहिट
इस गीत की एक और खास बात यह है कि इसके दो अलग-अलग वर्जन रिकॉर्ड किए गए थे। एक संस्करण को किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी, जबकि दूसरे संस्करण को लता मंगेशकर ने गाया। दोनों ही वर्जन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी समान रूप से पसंद किए जाते हैं।
समय के साथ ‘रिमझिम गिरे सावन’ सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं रहा, बल्कि भारतीय मानसून और रोमांटिक संगीत की सांस्कृतिक पहचान बन गया। दशकों बाद भी जब बारिश की पहली फुहार पड़ती है, तो यह गीत लोगों की यादों में उसी ताजगी के साथ लौट आता है, जैसे पहली बार सुना गया हो।