• July 24, 2026

अयोध्या में संतों का हुंकार: “राम मंदिर पर अनर्गल प्रलाप और दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं, सनातन विरोधी ताकतों का होगा सामाजिक बहिष्कार”

 अयोध्या में संतों का हुंकार: “राम मंदिर पर अनर्गल प्रलाप और दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं, सनातन विरोधी ताकतों का होगा सामाजिक बहिष्कार”

अयोध्या धाम | 23 जुलाई 2026

श्री राम सत्संग भवन धर्म मंडपम (मणिराम दास छावनी, अयोध्या धाम) में आयोजित एक विशाल संत-सभा और संगोष्ठी में देश-विदेश से जुटे सैकड़ों प्रमुख संत-महंतों ने सर्वसम्मति से श्रीराम जन्मभूमि और संत समाज के खिलाफ चलाए जा रहे भ्रामक अभियानों पर कड़ा ऐतराज जताया। राम जन्मभूमि से जुड़े हालिया घटनाक्रम और दुष्प्रचार का पुरजोर प्रतिकार करते हुए संतों ने स्पष्ट किया कि अयोध्या की छवि धूमिल करने की राजनीतिक और सनातन विरोधी साजिशों को कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा।

संगोष्ठी में मौजूद आचार्यों, महामंडलेश्वरों और अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों ने मीडिया तथा सोशल मीडिया पर अनर्गल बयानबाजी करने वालों को आड़े हाथों लिया और पूरे अयोध्या क्षेत्र में धार्मिक-सांस्कृतिक एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया।

योगी जी के नेतृत्व में अयोध्या का गौरव बढ़ा: महंत डॉ. रामानन्द दास

मंच का सफल संचालन करते हुए महंत डॉ. रामानन्द दास जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने राज्य को ‘उत्तम प्रदेश’ में बदल दिया है। उनके प्रयासों से आज पूरी दुनिया में अयोध्या धाम का मान-सम्मान कई गुना बढ़ा है।

उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई “संत हंस गुन गहिहिं पय, परिहरि बारि बिकार” का उल्लेख करते हुए कहा कि संत जन हमेशा विवेक से काम लेते हैं और केवल अच्छाइयों को ग्रहण करते हैं। आज विरोधी तत्वों को देश और अयोध्या का सर्वांगीण विकास पच नहीं रहा है, इसीलिए वे तरह-तरह के उपद्रव और षड्यंत्र रच रहे हैं। आगामी दिनों में महापुरुष ऐसी विघटनकारी शक्तियों के सभी मंसूबों को विफल करेंगे।

“चोरी के पीड़ितों को ही अपराधी बनाने का घिनौना खेल”: अधिकारी श्री राजकुमार दास जी

अयोध्या धाम को सात मोक्षदायिनी पुरियों में मुख्यतम बताते हुए श्रीराम वल्लभ कुंज के अधिकारी श्री राजकुमार दास जी महाराज ने कहा कि अयोध्या केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि उच्च मानवीय आदर्शों का केंद्र है।

हालिया घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा:

“यह कितना दुखद और आश्चर्यजनक है कि जिनकी व्यवस्था में सेंधमारी या चोरी हुई, जो इस घटना के पीड़ित हैं, उन्हीं को अपराधी बनाने का खेल खेला जा रहा है। यह वास्तव में श्रीराम मंदिर से संगठित और एकात्म हुए संपूर्ण हिंदू समाज की आस्था को छलने का एक षड्यंत्र था।”

उन्होंने कहा कि इस दुष्प्रचार का समय पर मुंहतोड़ जवाब न दे पाने के कारण विरोधियों को भ्रम फैलाने में सफलता मिली। संसद से लेकर सड़क तक भारत-भाव के शत्रु सक्रिय हैं। उन्होंने पूज्य तुलसीदास जी के वचनों को दोहराते हुए चेतावनी दी— “जाके प्रिय न राम वैदेही, तजिये ताहि कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेही।”

चंपत राय जी परम संत, उनके त्याग और संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता

संगोष्ठी में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के योगदान तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों का संतों ने पुरजोर समर्थन किया:

  • महंत गरीशदास जी महाराज (डांडिया मंदिर): “श्री चंपत राय जी एक परम संत हैं। उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह मिथ्या और निराधार हैं। उन्होंने जनभावनाओं और मर्यादा का सम्मान करते हुए स्वयं की प्रेरणा से त्यागपत्र दिया है। उन्होंने पिछले 50 वर्षों से निःस्वार्थ भाव से राम जन्मभूमि आंदोलन को सींचा है।”

  • महा राघवेश दास जी महाराज: “आरएसएस और विहिप के अथक प्रयासों से ही भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका है। कुछ मामूली चूक हो सकती है, लेकिन पूरा संत समाज एकजुट होकर इसे ठीक करेगा।”

  • महंत संजय दास (अखाड़ा परिषद अध्यक्ष): “शुरुआती दौर से ही चंपत राय जी के संघर्षों को भुलाया नहीं जा सकता। अनर्गल प्रलाप करने वाले असामाजिक तत्वों का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।”

5-सदस्यीय धार्मिक समिति के गठन का स्वागत

मंदिर की पूजा पद्धतियों और धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए 5-सदस्यीय संत-महंत धार्मिक समिति का चयन किया गया है।

  • रामायणी श्री रामकृष्ण दास जी और रामायणी श्री कमला दास जी ने कहा कि काल के प्रभाव से कभी-कभी अच्छे लोगों से भी चूक हो सकती है, लेकिन महापुरुष उस चूक में सुधार कर लेते हैं। संतों का नेतृत्व आने से सभी विघ्न और बाधाएं दूर होंगी।

  • महंत वैदेही वल्लभ शरण जी और श्री रामदास जी महाराज (नाका हनुमानगढ़ी) ने चयनित पांचों महापुरुषों को बधाई दी और कहा कि जिन्होंने कभी राम को स्वीकार नहीं किया, वे आज लांछन लगा रहे हैं। ऐसे ‘कालनेमियों’ से सावधान रहने की आवश्यकता है।

मीडिया, नैरेटिव वार और अनुपम खेर के बयान का जिक्र

आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी (श्री हनुमत् निवास) ने मौजूदा स्थिति का गहरा विश्लेषण करते हुए कहा कि इस समय एक ‘नैरेटिव वार’ चल रहा है।

फिल्म अभिनेता अनुपम खेर के हालिया वक्तव्य का हवाला देते हुए उन्होंने कहा:

“जब कहीं चोरी होती है, तो पुलिस चोर को पकड़ती है, घर के मालिक को नहीं। लेकिन राम मंदिर के मामले में सेवादारों को ही कटघरे में खड़ा करने का नाटक किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि दान की वस्तु जब दे दी जाती है, तो वह पाने वाले की हो जाती है, लेकिन दुष्प्रचार के कारण दाताओं का चित्त व्याकुल कर उन्हें हिसाब मांगने के पाप में धकेला जा रहा है। मीडिया केवल ‘कंटेंट’ खोजता है, उसे भाव और वेश का अंतर नहीं पता।

प्रमुख संतों के विचार और महत्वपूर्ण सुझाव

संगोष्ठी के दौरान विभिन्न संत-महंतों ने अयोध्या के गौरव और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:

  1. अयोध्यावासियों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य हो: महंत गरीशदास जी ने ट्रस्ट से निवेदन किया कि दर्शन व्यवस्था को सहज बनाने के लिए अयोध्या की जनता के लिए आधार कार्ड को ही प्रवेश का मुख्य आधार बनाया जाए।

  2. संतों का मौन और संयम: महंत मनीष दास जी (परम मंदिर) ने कहा कि संतों को विषम परिस्थितियों में सार्वजनिक गलतबयानी के बजाय मौन रहना चाहिए। अयोध्या में वही होगा जो संत समाज चाहेगा।

  3. शस्त्र-शास्त्र का त्याग नहीं: श्रीमहा जनार्दन दास जी (तुलसीदास छावनी) ने कहा कि राक्षस हर युग में रूप बदलकर आते हैं, लेकिन धर्म रक्षा के लिए संत समाज कभी शस्त्र और शास्त्र का त्याग नहीं करेगा।

  4. अनुशासन और मर्यादा: श्री रामानुज दास जी (सीताकांत सदन) और श्री सत्यदेव दास जी ने कहा कि आचार्यों की आज्ञा का पालन होना चाहिए और बिना सोचे-समझे बयानबाजी बंद होनी चाहिए।

  5. नियमित बैठकों का आयोजन: महा शशिकांत दास जी (आंजनेय सेवा संस्थान), डॉ. भरतदास जी (रानोपाली) और महंत मुरलीदास जी (हनुमान गढ़ी) ने सुझाव दिया कि अयोध्या के माहौल को स्वच्छ रखने के लिए हर 2-3 महीने में संतों की विचार-विमर्श संगोष्ठी होनी चाहिए।

अध्यक्षीय उद्बोधन: “दूध का दूध और पानी का पानी होगा” – महंत कमलनयन दास जी

संगोष्ठी के अंत में अध्यक्षीय भाषण देते हुए श्रीमणिरामदास छावनी के महंत कमलनयन दास जी महाराज ने कहा:

“जो लोग अदालत में रामजी के खिलाफ गवाही देते थे, वे आज राम मंदिर में चोरी की चिंता कर रहे हैं! वास्तव में चोरी नहीं, बल्कि विश्वासघात हुआ है। विदेशों से सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने और दुष्प्रचार फैलाने के लिए भारी फंडिंग हो रही है। लेकिन सत्य को दबाया नहीं जा सकता। समय आने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

उन्होंने समस्त संत समाज और रामभक्तों का आह्वान किया कि वे एकजुट होकर सनातन विरोधी कुचक्रों को पूरी तरह विफल करें।

निष्कर्ष

श्री राम सत्संग भवन में हुई इस ऐतिहासिक बैठक ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अयोध्या का संत समाज पूरी तरह एकजुट है। राम मंदिर की साख, सनातन परंपरा और अयोध्या धाम की मर्यादा से खिलवाड़ करने वाली किसी भी विदेशी या देसी साजिश को संत समाज मुंहतोड़ जवाब देगा।

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