• September 7, 2026

लाल के बाद अब नीले रंग में दिखेगी समाजवादी छात्रसभा, अखिलेश यादव की नई रणनीति से सियासी हलचल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति में एक नया रंग जोड़ दिया है। अब तक लाल रंग की पहचान वाली समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ता जल्द ही नीली टीशर्ट में नजर आएंगे। छात्रसभा की नई टीशर्ट पर समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल के साथ बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी लगाई गई है।

समाजवादी छात्रसभा के इस बदलाव को यूपी की सियासत में दलित वोटरों तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद भी नीला गमछा पहने नजर आए थे। ऐसे में पार्टी की छात्र इकाई की टीशर्ट का रंग लाल से नीला होना राजनीतिक संदेश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लाल से नीला क्यों? सियासत में बढ़ी चर्चा

समाजवादी पार्टी लंबे समय से लाल और हरे रंग की पहचान के साथ राजनीति करती रही है। वहीं, नीले रंग को उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित समाज और बहुजन राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) का झंडा भी नीले रंग का है।

ऐसे में समाजवादी छात्रसभा की टीशर्ट में नीले रंग को शामिल करने और उस पर बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर लगाने को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर इसे समाजवादी पार्टी की दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर इसके पीछे की चुनावी रणनीति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

यूपी में करीब 21 फीसदी दलित आबादी का वोट

उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में दलित वोट बैंक बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य में दलित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत बताई जाती है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं।

वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के बाद सपा का फोकस अपने सामाजिक समीकरण को और मजबूत करने पर है।

ऐसे में अखिलेश यादव की ओर से नीले रंग के इस्तेमाल और छात्रसभा की नई टीशर्ट में बाबा साहब की तस्वीर को पार्टी की रणनीति में दलित युवाओं को जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अखिलेश का नीला गमछा भी बना था चर्चा का विषय

समाजवादी छात्रसभा की टीशर्ट में बदलाव से पहले अखिलेश यादव हाल ही में एक कार्यक्रम में नीला गमछा पहने नजर आए थे। इसके बाद उनके इस अंदाज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

अब छात्रसभा की टीशर्ट का रंग भी नीला किए जाने से इन चर्चाओं को और बल मिला है। सपा के इस कदम को खासतौर पर युवा और दलित मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

PDA की नई व्याख्या भी दे चुके हैं अखिलेश

अखिलेश यादव हाल ही में अपने PDA की नई व्याख्या को लेकर भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने PDA का मतलब Protest, Demonstration और Activist बताया था।

अखिलेश ने कहा था कि जो लोग विरोध करते हैं, प्रदर्शन करते हैं और अपनी बात रखने के लिए सक्रिय रहते हैं, वे PDA का हिस्सा हैं।

इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधा था। अखिलेश ने कहा था कि समाज ने लंबे समय से समस्याएं झेली हैं और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इन्हें काफी हद तक सामान्य करने की कोशिश की।

उन्होंने बीजेपी पर आरक्षण को लेकर भी आरोप लगाए थे और पार्टी कार्यकर्ताओं से राजनीतिक नैरेटिव को लेकर सतर्क रहने की अपील की थी।

दलित वोट पर क्यों है सभी दलों की नजर?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होना स्वाभाविक है। लंबे समय तक दलित राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रही मायावती की BSP की चुनावी ताकत में पिछले कुछ चुनावों में गिरावट देखने को मिली है।

ऐसे राजनीतिक माहौल में समाजवादी पार्टी दलित समाज, खासकर युवा मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश करती नजर आ रही है।

साइकिल के साथ बाबा साहब की तस्वीर और नीले रंग का इस्तेमाल इसी व्यापक सामाजिक समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी असर विधानसभा चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगा।

योगी आदित्यनाथ भी साध चुके हैं अखिलेश पर निशाना

वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साध रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश का जिक्र किया था।

ऐसे में चुनाव से पहले जहां बीजेपी अपनी सरकार के कामकाज और कानून-व्यवस्था को मुद्दा बना रही है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने सामाजिक समीकरण को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

अब देखना होगा कि लाल रंग की पहचान वाली समाजवादी छात्रसभा का नीले रंग की ओर यह कदम आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को कितना प्रभावित करता है।

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