• September 7, 2026

ISRO को लेकर पवन गोयनका का बड़ा बयान, बोले- कर्मचारियों को भविष्य की चिंता करने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के बीच ISRO की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं पर IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने बड़ा बयान दिया है। स्पेस एक्सपो के उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि ISRO के कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर बिल्कुल भी चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि ISRO की भूमिका कम हो जाएगी।

पवन गोयनका ने कहा कि जो लोग यह मान रहे हैं कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों और निजी कंपनियों के बढ़ते प्रवेश के कारण ISRO का महत्व कम हो जाएगा, उन्हें अपनी सोच पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, आने वाले वर्षों में ISRO के सामने इतना बड़ा और महत्वपूर्ण काम है कि उसकी भूमिका पहले की तरह ही बेहद अहम बनी रहेगी।

चंद्रयान से भारतीय स्पेस स्टेशन तक कई बड़े मिशन

गोयनका ने भारत के आगामी अंतरिक्ष कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि ISRO के पास इस समय कई महत्वाकांक्षी मिशन और परियोजनाएं हैं। इनमें चंद्रयान सीरीज, गगनयान, भारतीय स्पेस स्टेशन, चांद पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजना, शुक्र और मंगल मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं।

इसके अलावा दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले भारी पेलोड वाले लॉन्च व्हीकल, NavIC को मजबूत करने और SPS सीरीज के सैटेलाइट्स से जुड़े काम भी आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शायद ही कभी ऐसा समय रहा हो जब ISRO के पास एक साथ इतने बड़े स्तर पर अलग-अलग मिशन और तकनीकी परियोजनाएं रही हों। उनके अनुसार, इन सभी परियोजनाओं के लिए ISRO रीढ़ की हड्डी और मजबूत आधार की भूमिका निभा रहा है।

‘हर किसी की अपनी भूमिका है’

पवन गोयनका ने अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास में ISRO, निजी कंपनियों और अन्य संस्थाओं की भूमिका को लेकर कहा कि पूरे सिस्टम की सफलता सामूहिक प्रयास पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि व्यवस्था तभी आगे बढ़ सकती है, जब सभी संस्थाएं अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए मिलकर काम करें। कुछ परियोजनाएं पहले ही आकार ले चुकी हैं, जबकि कई अन्य अभी विकास के चरण में हैं। उनके मुताबिक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के सामने इस समय बहुत बड़ा अवसर मौजूद है।

2020 के स्पेस सेक्टर रिफॉर्म पर भी दिया जोर

इससे पहले भी पवन गोयनका ने कहा था कि ISRO की भूमिका को कम करना अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का उद्देश्य नहीं है। वर्ष 2020 में शुरू किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों का मकसद देश के पूरे स्पेस इकोसिस्टम का विस्तार करना था।

गोयनका के मुताबिक, सुधारों के जरिए निजी उद्योग को प्रक्षेपण यानों, सैटेलाइट्स और दूसरी अंतरिक्ष प्रणालियों के निर्माण और बड़े पैमाने पर उत्पादन में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।

वहीं ISRO का फोकस अत्याधुनिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वैज्ञानिक मिशन, रणनीतिक अभियानों, नई तकनीकों और ऐसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर रहेगा, जिसे निजी क्षेत्र के लिए अकेले विकसित करना मुश्किल है।

9 कर्मचारी संगठनों ने मांगा था स्पष्टीकरण

पवन गोयनका का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने संगठन के अध्यक्ष वी. नारायणन को पत्र लिखकर ISRO के विनिर्माण और परिचालन से जुड़े कार्यों को निजी संस्थाओं को सौंपे जाने की चर्चाओं पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा था।

कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को लिखे पत्र में गोयनका की 21 अगस्त की टिप्पणियों का हवाला दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, एक सार्वजनिक कार्यक्रम में गोयनका ने कहा था कि भविष्य में ISRO प्रक्षेपण यानों का निर्माण नहीं करेगा और यह जिम्मेदारी निजी क्षेत्र अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) को दी जा सकती है।

इसी बयान के बाद ISRO के भीतर इन बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब गोयनका ने एक बार फिर स्पष्ट करने की कोशिश की है कि निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ने का अर्थ ISRO के महत्व में कमी आना नहीं है।

EOS-05 की सफल लॉन्चिंग के बाद फिर चर्चा में ISRO

इस बीच ISRO ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 जियोसिंक ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस लॉन्चिंग ने एक बार फिर भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं और ISRO की तकनीकी भूमिका को रेखांकित किया है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ने के साथ अब ISRO के भविष्य की भूमिका को लेकर बहस भी तेज हो रही है। पवन गोयनका का ताजा बयान इसी बहस के बीच यह संदेश देता है कि निजी क्षेत्र के विस्तार और ISRO की मजबूती को एक-दूसरे के विरोध में देखने की जरूरत नहीं है।

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