सनातन धर्म विवाद पर तमिलनाडु में फिर गरमाई राजनीति, आधव अर्जुन बोले- ‘हम हिंदुओं के नहीं, हिंदुत्व के खिलाफ’
तमिलनाडु में सनातन धर्म को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तमिलनाडु सरकार में मंत्री और TVK के महासचिव आधव अर्जुन ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे आखिर कहना क्या चाहते हैं।
आधव अर्जुन ने कहा कि उनकी पार्टी हिंदुओं के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उदयनिधि स्टालिन को सनातन धर्म की सही समझ नहीं है।
‘उदयनिधि स्टालिन को नहीं पता कि सनातन धर्म क्या है’
आधव अर्जुन ने कहा, “उदयनिधि स्टालिन को नहीं पता कि सनातन धर्म क्या है। हिंदू, मुस्लिम और ईसाई — हम सभी को बराबरी से देखते हैं। व्यक्तिगत रूप से मैं भगवान में विश्वास नहीं करता, लेकिन एक मंत्री होने के नाते मुझे सभी धर्मों का सम्मान करना पड़ता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम हिंदुओं के खिलाफ नहीं हैं, हम हिंदुत्व के खिलाफ हैं। हिंदुत्व का मतलब एक धर्म को दूसरों पर थोपना है।”
अर्जुन के मुताबिक तमिलनाडु की राजनीति हमेशा समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में सनातन धर्म को हिंदू धर्म के रूप में देखा जाता है, जबकि तमिलनाडु के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में इसे असमानता से जोड़कर देखा जाता है।
‘हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं, असमानता के खिलाफ हैं’
आधव अर्जुन ने कहा, “तमिलनाडु हमेशा समानता के आधार पर खड़ा रहा है। उत्तर भारत में सनातन धर्म का मतलब हिंदू धर्म माना जाता है, लेकिन तमिलनाडु में इसे असमानता के रूप में देखा जाता है। इसलिए उदयनिधि स्टालिन को अपने बयान पर और स्पष्टता देनी चाहिए। हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं, हम असमानता के खिलाफ हैं।”
दरअसल, यह विवाद उस समय फिर से गहरा गया जब डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि “सनातन, जिसने लोगों को बांटा है, उसे समाप्त कर देना चाहिए।”
BJP ने साधा निशाना
उदयनिधि स्टालिन के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता सीआर केसवन ने इसे “जहरीली राजनीति” बताया।
केसवन ने कहा, “उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के राहुल गांधी हैं, जो समाज को बांटने वाली नफरत की राजनीति कर रहे हैं। राहुल गांधी ने पवित्र सेंगोल का मजाक उड़ाया था और राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का बहिष्कार किया था। उसी तरह उदयनिधि स्टालिन भी लगातार विवादित बयान दे रहे हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके पहले भी हिंदू परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों का विरोध करती रही है। उल्लेखनीय है कि उदयनिधि स्टालिन इससे पहले भी सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं।