• July 6, 2026

जसवंत सिंह खालड़ा की गुमशुदगी फिर चर्चा में: दिलजीत की फिल्म ‘सतलुज’ विवाद ने याद दिलाया 1995 का पंजाब केस

नई दिल्ली: पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर उठे विवाद के बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह केस 1990 के दशक में पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और गैरकानूनी हिरासतों को उजागर करने वाले सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जाता है। जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा को अमृतसर के कबीर पार्क इलाके में उनके घर के बाहर से उस समय कथित तौर पर पंजाब पुलिस द्वारा उठाया गया, जब वे अपनी कार धो रहे थे। इसके बाद वे कभी वापस नहीं लौटे। उस समय खालड़ा ने पंजाब में आतंकवाद के दौर के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से किए गए गैरकानूनी अंतिम संस्कारों और जबरन गुमशुदगी के मामलों को उजागर किया था। उनकी गुमशुदगी के बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई शुरू की, जो आज तक जारी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां 11 सितंबर 1995 को एक टेलीग्राम को ही बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मानते हुए अदालत ने गंभीर संज्ञान लिया। अदालत ने पंजाब के गृह सचिव, डीजीपी और एसएसपी अमृतसर से जवाब तलब किया और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई जांच में यह सामने आया कि खालड़ा को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था और उन्हें तरनतारन जिले के कांग पुलिस स्टेशन में रखा गया था, हालांकि बाद में उनका कोई सुराग नहीं मिला। जांच रिपोर्ट में पंजाब पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। 1996 में सीबीआई ने बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघनों का खुलासा किया, जिसमें सैकड़ों शवों की पहचान और हजारों अज्ञात मामलों का उल्लेख किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया और आगे की जांच के आदेश दिए। बाद में इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया गया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने पांच पुलिसकर्मियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। जसवंत सिंह खालड़ा का यह मामला आज भी मानवाधिकारों और न्याय व्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा वर्षों से इस संघर्ष को जारी रखे हुए हैं ताकि उनके पति द्वारा उजागर किए गए सच को भुलाया न जा सके। गौरतलब है कि इसी विषय से प्रेरित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर हाल में विवाद सामने आया है, जिसके चलते यह ऐतिहासिक मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

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