• June 23, 2026

इंटरनेशनल ओलंपिक डे: पौड़ी की तड़ियाल सिस्टर्स की प्रेरक कहानी, सीमित संसाधनों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

देहरादून: इंटरनेशनल ओलंपिक डे हर साल 23 जून को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को खेल, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। इस खास अवसर पर उत्तराखंड के पौड़ी जिले की तड़ियाल सिस्टर्स की कहानी प्रेरणा का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इन चार बहनों ने जूडो, जू-जित्सु, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) और अन्य खेलों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

खेल परिवार से मिली प्रेरणा

तड़ियाल बहनों के पिता राजेंद्र सिंह तड़ियाल रक्षा सेवाओं में रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उनकी मां लाजवंती तड़ियाल एथलेटिक्स से जुड़ी रही हैं। ऐसे समय में जब लड़कियों का मार्शल आर्ट्स और जूडो जैसे खेलों में जाना आम नहीं माना जाता था, परिवार ने समाज की सोच से ऊपर उठकर बेटियों के सपनों को प्राथमिकता दी। बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए परिवार पौड़ी से दिल्ली शिफ्ट हो गया। स्नेहा तड़ियाल के मुताबिक आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं। कई बार चारों बहनें महज 200 रुपये लेकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने जाती थीं और पदक जीतकर लौटती थीं।

सुचिका तड़ियाल: जूडो से MMA तक का शानदार सफर

सबसे बड़ी बहन सुचिका तड़ियाल ने कम उम्र में ही जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली थी। वह आठ बार राष्ट्रीय जूडो चैंपियन रह चुकी हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप और साउथ एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीते। इसके बाद उन्होंने जू-जित्सु और फिर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की ओर कदम बढ़ाया। ग्रीस में आयोजित जू-जित्सु वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रचा। वर्तमान में वह अंतरराष्ट्रीय MMA सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और भारतीय महिला फाइटर्स की नई पीढ़ी की प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

ताइविथा तड़ियाल: शांत स्वभाव, दमदार प्रदर्शन

ताइविथा तड़ियाल ने भी जूडो में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वर्ष 2018 में जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में अंडर-44 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया। इसके अलावा 2019 में विशाखापट्टनम में आयोजित इंडिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी अपने नाम किया। उनकी तकनीकी दक्षता, संतुलन और ग्रिप कंट्रोल को जूडो जगत में काफी सराहा जाता है।

शालिनी तड़ियाल: खिलाड़ी से कोच बनने तक

शालिनी तड़ियाल ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रशिक्षण के दौरान अपनी तकनीकी समझ और फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, जिसमें जापान में आयोजित एशियन जूनियर चैंपियनशिप भी शामिल है। हालांकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक नहीं मिला, लेकिन खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक सफल जूडो कोच के रूप में स्थापित किया है। आज वह नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर रही हैं।

स्नेहा तड़ियाल: खेल मैदान से पुलिस सेवा तक

सबसे छोटी बहन स्नेहा तड़ियाल ने भी जूडो से अपने खेल करियर की शुरुआत की। हालांकि उनके पिता उन्हें हॉकी गोलकीपर बनते देखना चाहते थे, लेकिन उन्होंने जूडो को चुना और इसमें उल्लेखनीय सफलता हासिल की। स्नेहा ने 13वीं विश्व सीनियर कुराश चैंपियनशिप 2022 में +87 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने जिम्नास्टिक में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किए। वर्तमान में स्नेहा तड़ियाल उत्तराखंड पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और खेल के साथ-साथ युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल

तड़ियाल सिस्टर्स की कहानी केवल खेल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और परिवार के समर्थन की भी कहानी है। सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली ये चारों बहनें आज उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *