2027 की तैयारी में जुटे CM योगी, मंत्रिमंडल विस्तार से साधे जातीय और हिंदुत्व समीकरण
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। Yogi Adityanath ने जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए अपने मंत्रिमंडल में छह नए चेहरों को शामिल कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है।
राज्य में 22 मई से जाति जनगणना का काम शुरू होने जा रहा है। इसी बीच राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी ने चुनावी गणित को ध्यान में रखते हुए सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश तेज कर दी है।
मंत्रिमंडल में शामिल हुए 6 नए चेहरे
योगी सरकार में शामिल किए गए नए चेहरों में Bhupendra Chaudhary, Manoj Pandey, Kailash Rajput, Surendra Diler, Hansraj Vishwakarma और Krishna Paswan शामिल हैं।
इसके अलावा Ajit Singh Pal और Somendra Tomar को भी प्रमोशन दिया गया है। नए मंत्रियों में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने व्यापक सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है।
धर्म और जाति के संतुलन पर फोकस
मंत्रिपद की शपथ के दौरान कई नए मंत्रियों का धार्मिक प्रतीकों के साथ नजर आना भी चर्चा में रहा। किसी ने ‘जय श्री राम’ वाला पटका पहना तो किसी ने ‘राधे-राधे’ लिखा गमछा डाला। इसे बीजेपी के हिंदुत्व और सामाजिक समीकरणों को साथ लेकर चलने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘मंडल’ और ‘कमंडल’ दोनों की अहम भूमिका रही है। ऐसे में बीजेपी जातीय समीकरणों के साथ हिंदुत्व के एजेंडे को भी मजबूत बनाए रखना चाहती है।
अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर नजर
वहीं दूसरी ओर Akhilesh Yadav लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी मुस्लिम और यादव वोट बैंक के साथ अन्य जातीय समूहों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने सीटवार जातीय समीकरणों के हिसाब से उम्मीदवार उतारे थे और अब माना जा रहा है कि 2027 में भी पार्टी इसी रणनीति को आगे बढ़ा सकती है।
बीजेपी का फोकस हिंदू वोट और लॉ एंड ऑर्डर
बीजेपी की रणनीति धर्म, जाति और कानून व्यवस्था के मुद्दों को एक साथ जोड़कर व्यापक हिंदू वोट बैंक तैयार करने की मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी लगातार ‘ना कर्फ्यू, ना दंगा, सब चंगा’ जैसे नारों के जरिए कानून व्यवस्था को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करते रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2027 का चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि यह बीजेपी और सपा दोनों के लिए राजनीतिक भविष्य तय करने वाला मुकाबला भी साबित हो सकता है।