• May 30, 2026

‘अगर RSS मजबूत होता तो नहीं होता देश का विभाजन’, सुनील आंबेकर का बड़ा बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने देश के विभाजन को भारत के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक बताते हुए बड़ा बयान दिया है। नागपुर में आयोजित एक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि अगर वर्ष 1947 में RSS आज की तरह मजबूत होता, तो देश का विभाजन नहीं होता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उस समय संघ अपनी इच्छानुसार उतना मजबूत नहीं था, लेकिन फिर भी उसने विभाजन के दौरान हिंदुओं की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए पूरी ताकत से काम किया।

‘देश का विभाजन सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक’

सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत का विभाजन इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा, “अगर उस समय संघ आज जितना मजबूत होता, तो शायद देश का बंटवारा नहीं होता।” उन्होंने बताया कि 1947 में RSS सीमित संसाधनों और प्रभाव के बावजूद राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल था।

‘संघ किसी से नफरत नहीं करता’

RSS को लेकर फैलाई जाने वाली धारणाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए आंबेकर ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए अक्सर संघ के बारे में गलत जानकारियां फैलाई जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS किसी भी वर्ग या समुदाय से नफरत नहीं करता और संवाद में विश्वास रखता है।

उन्होंने कहा, “संघ समाज के सभी वर्गों को अपना मानता है और हमेशा चर्चा तथा संवाद के लिए तैयार रहता है।”

पाकिस्तान से संवाद पर क्या बोले?

RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने संबंधी बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में आंबेकर ने कहा कि RSS का मानना है कि लोगों के बीच बातचीत और संवाद से समस्याओं का समाधान निकल सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार-से-सरकार के स्तर पर बातचीत पूरी तरह राजनीतिक और कूटनीतिक निर्णय होता है, जिसमें RSS तत्काल हस्तक्षेप या सलाह नहीं देता। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद रिश्तों को बनाए रखने और समाधान के रास्ते खोजने में मददगार हो सकता है।

‘जय भीम-लाल सलाम’ नारे पर प्रतिक्रिया

कुछ समूहों द्वारा लगाए जा रहे ‘जय भीम-लाल सलाम’ नारे पर प्रतिक्रिया देते हुए आंबेकर ने कहा कि जब तक गौतम बुद्ध का शांति का मार्ग मौजूद है, तब तक कार्ल मार्क्स जैसे वैचारिक रास्तों पर चलने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के मूल विचारों को समझना और उन्हें सही संदर्भ में देखना जरूरी है।

लोकतंत्र में मतभेद सामान्य: आंबेकर

देश में युवाओं की भागीदारी और विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए आंबेकर ने कहा कि भारत एक जागरूक लोकतंत्र है, जहां अलग-अलग विचार और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा, “देश में स्वतंत्र मीडिया, सोशल मीडिया, पारदर्शी चुनाव और मजबूत संस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे में अलग-अलग विचार सामने आना असामान्य नहीं है।”

युवाओं को भारत के भविष्य पर भरोसा

युवा पीढ़ी को लेकर आंबेकर ने कहा कि आज के युवा भारत के भविष्य को लेकर आशावान हैं और संविधान के दायरे में रहकर देश के विकास में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति में युवाओं की बड़ी भूमिका है और यही युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *