बकरीद पर ‘गो-वध मुक्त ईद’ की अपील का हिमंत सरमा ने किया स्वागत, बोले- इससे बढ़ेगा सांप्रदायिक सौहार्द
असम में आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) के दौरान गो-वध न करने की अपील को लेकर नया राजनीतिक और सामाजिक विमर्श शुरू हो गया है। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने राज्य की विभिन्न ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय से बकरीद के अवसर पर गाय की कुर्बानी से परहेज करने की अपील की गई है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल को राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक सनातन समाज की भावनाओं का सम्मान करने का यह प्रयास शांति और भाईचारे के माहौल को और मजबूत करेगा।
सरमा ने कहा, “मैं असम के बहुसंख्यक सनातन समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने की इस पहल का स्वागत करता हूं। ऐसे स्वैच्छिक कदम राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देंगे। मुझे उम्मीद है कि अन्य ईद कमेटियां भी इसी तरह की अपील जारी करेंगी। मैं सभी ईद कमेटियों से आगे आकर इस ईद को ‘गो-वध मुक्त’ बनाने का आह्वान करता हूं।”
दरअसल, 23 मई को धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी ने एक आधिकारिक नोटिस जारी कर लोगों से राज्य के कानूनों का पालन करने की अपील की थी। कमेटी ने कहा कि असम में लागू पशु संरक्षण कानूनों के तहत गायों की कुर्बानी कानूनी रूप से प्रतिबंधित है और इसका उल्लंघन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
कमेटी ने अपने नोटिस में चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके तहत कम से कम तीन साल से लेकर सात साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
धार्मिक पहलू पर भी कमेटी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं मानी गई है। बयान में कहा गया कि गाय पारंपरिक रूप से कई परिवारों के लिए एक विकल्प रही है, लेकिन इस्लामी परंपरा में अन्य वैकल्पिक हलाल जानवरों की कुर्बानी की भी अनुमति है।
इस मुद्दे को लेकर अब राज्य में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं, जबकि सरकार इसे धार्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में सकारात्मक पहल मान रही है।