सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को 2 महीने में मुख्य अपील पर फैसला देने का निर्देश दिया
पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़े चर्चित उन्नाव रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को मुख्य अपील पर दो महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि हाईकोर्ट को लगे कि तय समय में फैसला देना संभव नहीं है, तो वह शिकायतकर्ता के वकील समेत सभी पक्षों को सुनने के बाद सजा स्थगन की मांग पर नया आदेश पारित कर सकता है।
दरअसल, कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए CBI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष दिसंबर में हाईकोर्ट द्वारा सेंगर की सजा निलंबित करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई 25 तारीख को निर्धारित है। इस पर सेंगर के वकील ने कहा कि वे अपील के अंतिम फैसले में कोई बाधा नहीं डाल रहे हैं, लेकिन फिलहाल सजा निलंबन के आदेश पर रोक लगी हुई है। उन्होंने दावा किया कि वे यह साबित करने की स्थिति में हैं कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी।
सुनवाई के दौरान सेंगर की ओर से यह भी दलील दी गई कि उन्हें इस आधार पर हिरासत में रखा गया है कि वे एक “लोक सेवक” हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सवाल उठाया कि क्या एक विधायक को लोक सेवक माना जा सकता है।
क्या है उन्नाव रेप मामला?
उन्नाव रेप मामला वर्ष 2017 का है, जिसमें उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की से कथित गैंगरेप और बाद में पीड़ित परिवार के न्याय की लड़ाई का मामला सामने आया था। इस मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर मुख्य आरोपी हैं।