AAP में बड़ी दरार: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने सात राज्यसभा सांसदों के साथ इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने AAP के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों और नेतृत्व संकट को खुलकर सामने ला दिया है।
यह राजनीतिक घटनाक्रम अचानक भले ही चौंकाने वाला लगे, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि पिछले कई महीनों से बन रही थी। पार्टी के अंदर असंतोष, नेतृत्व पर सवाल और आपसी अविश्वास धीरे-धीरे बढ़ता गया, जो अब खुली बगावत में बदल गया है।
विवाद की शुरुआत
इस संकट की जड़ें 2024 में सामने आए उस विवाद से जुड़ी हैं, जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया था कि 13 मई को केजरीवाल के आवास पर उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार हुआ। इस घटना ने पार्टी के भीतर असहजता और तनाव को जन्म दिया, जिससे नेताओं के बीच दूरी बढ़ती गई।
अंदरूनी खींचतान और बढ़ती दरार
मालीवाल प्रकरण के बाद पार्टी के भीतर असहमति के संकेत लगातार मिलते रहे। हाल ही में स्थिति तब और बिगड़ गई, जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता पद से हटा दिया गया। इसके बाद यह कयास तेज हो गए कि पार्टी के कई सांसद जल्द ही अलग राह चुन सकते हैं।
हालांकि अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और संदीप पाठक जैसे नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर असहमति नहीं जताई थी, लेकिन उनका सामूहिक इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
चड्ढा का ऐलान और आरोप-प्रत्यारोप
शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने सात सांसदों के इस्तीफे की पुष्टि की। इस बीच अशोक मित्तल का इस्तीफा ऐसे समय में आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके ठिकानों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामले में छापेमारी की।
AAP नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम BJP के कथित “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा है। उनका दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में सांसदों ने इस्तीफा दिया।
AAP में चड्ढा का सफर
राघव चड्ढा को कभी केजरीवाल का करीबी माना जाता था और वे पार्टी में तेजी से उभरे। 2022 में वे पंजाब से राज्यसभा पहुंचे और राज्य में पार्टी की जीत के बाद उनका कद और बढ़ा।
लेकिन 2024 में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद चड्ढा की भूमिका पर सवाल उठने लगे। अहम मौकों पर उनकी गैरमौजूदगी और चुप्पी ने पार्टी नेतृत्व को नाराज किया, जिसके चलते उन्हें कई महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया गया।
तत्काल कारण और राजनीतिक असर
चड्ढा को राज्यसभा उप-नेता पद से हटाना इस संकट का तात्कालिक कारण माना जा रहा है। उन्होंने उस समय संकेत दिया था कि वे “सही समय पर जवाब देंगे”, जो अब बड़े राजनीतिक कदम के रूप में सामने आया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब, गुजरात और गोवा में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में AAP के लिए यह संकट उसके राजनीतिक भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है।
मालीवाल का बयान
स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में कहा कि पार्टी छोड़ने का फैसला उन्होंने भ्रष्टाचार, महिलाओं के कथित उत्पीड़न और नेतृत्व शैली को लेकर गंभीर चिंताओं के चलते लिया।