मोदी सरकार के 12 साल: किसान कल्याण से आत्मनिर्भरता तक, मध्यप्रदेश में ‘डबल इंजन’ सरकार का फोकस अन्नदाता पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान केंद्र सरकार ने किसानों के कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू कीं। कृषि प्रधान राज्य मध्यप्रदेश में भी किसानों के हित में अनेक योजनाओं और नीतियों को लागू किया गया, जिनका असर कृषि उत्पादन, सिंचाई, फसल विविधीकरण और किसान आय में वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मंत्र के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने को प्राथमिकता दी। वहीं मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने कृषि क्षेत्र में कई योजनाओं को आगे बढ़ाया है।
मध्यप्रदेश को प्राथमिकता में रखने का दावा
राज्य सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों के बावजूद मध्यप्रदेश को हमेशा प्राथमिकता दी। प्रदेश में किसानों की समृद्धि और कृषि विकास को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर कई योजनाएं लागू कीं, जिनमें सिंचाई, बीमा, आधुनिक कृषि तकनीक, बाजार सुविधाओं और आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
किसान सम्मान निधि से मिली आर्थिक सहायता
केंद्र सरकार की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जाती है। मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
इसके अलावा, राज्य सरकार की मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत भी किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार के अनुसार, अब तक 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में 20,878 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है।
गेहूं उपार्जन में रिकॉर्ड का दावा
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 में गेहूं खरीदी के लिए 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है। इस वर्ष प्रदेश में 3,627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं।
सरकार ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया है। साथ ही, गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
बोनस, मुआवजा और कृषि सुधारों पर जोर
राज्य सरकार ने उड़द पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने और सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने जैसे कदम उठाए हैं।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि अधिग्रहण पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। आपदा प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज भी वितरित किए गए हैं।
आधुनिक खेती और सिंचाई पर फोकस
मध्यप्रदेश सरकार ने 2026 को कृषि कल्याण वर्ष घोषित करते हुए खेती का रकबा बढ़ाने, सिंचाई विस्तार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में काम शुरू किया है।
राज्य सरकार का दावा है कि तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं से 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं, माइक्रो इरीगेशन, बीज परीक्षण लैब, आधुनिक मंडियां और तहसील स्तर पर मौसम केंद्र जैसी पहलें भी शुरू की गई हैं।
आत्मनिर्भर किसान की ओर बढ़ते कदम
कृषक मित्र योजना के तहत किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं, जिससे बिजली पर निर्भरता कम हो रही है। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और जैविक खेती को बढ़ावा देकर कृषि आय के विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि किसानों को 5 रुपये में बिजली कनेक्शन, शून्य ब्याज दर पर फसल ऋण, नि:शुल्क मृदा परीक्षण और गुणवत्तापूर्ण बीज-खाद जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कृषि विकास के जरिए आर्थिक मजबूती पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाए बिना प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं है। सरकार प्रत्यक्ष लाभ, उचित मूल्य, सिंचाई और राहत योजनाओं के जरिए किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर काम कर रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि किसान केंद्रित योजनाओं से मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में किसानों की आत्मनिर्भरता प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।