धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला बरकरार
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाकर उसका सक्रिय रूप से पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं रह सकता।
धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जा समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Constitution (Scheduled Caste) Order, 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों तक सीमित है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका SC दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है, भले ही वह जन्म से अनुसूचित जाति में क्यों न आता हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे व्यक्ति को संविधान या किसी भी कानून के तहत मिलने वाले आरक्षण, संरक्षण या अन्य वैधानिक लाभों का दावा करने का अधिकार नहीं होगा।
SC/ST एक्ट के तहत दर्ज किया गया था मामला
यह फैसला एक ऐसे मामले में आया, जिसमें एक व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाने के बाद पादरी के रूप में कार्य करते हुए SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उसने दावा किया था कि उस पर हमला किया गया था और उसे इस कानून के तहत संरक्षण मिलना चाहिए।
आरोपियों ने दी थी चुनौती
हालांकि, आरोपियों ने इस मुकदमे को अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि संबंधित व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर चुका है और सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, इसलिए वह SC वर्ग के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि कानून में इस मामले में कोई अपवाद नहीं है और जो व्यक्ति निर्धारित धर्मों के बाहर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, वह अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता।