• June 13, 2026

संघ का लक्ष्य भारतमाता को विश्व गुरु बनाना है, ‘पंच परिवर्तन’ से बदलेगा समाज: सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल जी

 संघ का लक्ष्य भारतमाता को विश्व गुरु बनाना है, ‘पंच परिवर्तन’ से बदलेगा समाज: सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल जी

उन्नाव। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का भव्य समापन समारोह शनिवार, 6 जून को उन्नाव में संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने अपनी अनुशासित कदमताल और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन कर राष्ट्र

प्रथम की भावना को रेखांकित किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह श्री अनिल जी ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का मूल उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से एक संगठित, सक्षम एवं राष्ट्रभक्त समाज का निर्माण करना है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ की शाखा पद्धति व्यक्ति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम है, जिसके द्वारा समाज जागरण एवं व्यवस्था परिवर्तन का कार्य देश भर में निरंतर चल रहा है।

त्याग, तपस्या और अनुशासन का केंद्र है संघ शिक्षा वर्ग

अपने मुख्य उद्बोधन में श्री अनिल ने शिक्षा वर्ग के उद्देश्य और उसके सांगठनिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

“संघ शिक्षा वर्ग केवल शारीरिक अथवा बौद्धिक प्रशिक्षण का कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं है। यह स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का माध्यम है, जो उनमें त्याग, तपस्या, समर्पण और कड़े अनुशासन के संस्कार बोता है। वर्ग में प्राप्त यही संस्कार स्वयंसेवकों को राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके वास्तविक उत्तरदायित्वों का बोध कराते हैं।”

वर्तमान चुनौतियाँ और समाज का दायित्व

देश की वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि भारत आज भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही क्षेत्रों में अभूतपूर्व और निरंतर प्रगति कर रहा है। वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा और साख लगातार बढ़ रही है। लेकिन इस गौरव के साथ ही उन्होंने समाज के समक्ष खड़ी गंभीर आंतरिक चुनौतियों के प्रति भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि:

  • युवाओं में राष्ट्रभावना का क्षय होना।

  • देश में तेजी से बढ़ता जनसंख्या असंतुलन।

  • पाश्चात्य संस्कृति का अंधाधुंध अनुकरण।

  • अत्यधिक भौतिकतावादी सोच और मानवीय जीवन मूल्यों में लगातार आती गिरावट।

ये सभी समस्याएँ आज पूरे समाज और देश के लिए गहरी चिंता का विषय हैं।

राष्ट्रभक्ति भावनात्मक नहीं, आचरण का विषय: ‘पंच परिवर्तन’ पर जोर

श्री अनिल जी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रभक्ति केवल एक भावनात्मक विषय या नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देने वाली हमारे आचरण की प्रक्रिया है। जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करेगा, तभी राष्ट्र वास्तविक रूप से सशक्त और समृद्ध बनेगा।

इन समसामयिक चुनौतियों के समाधान के रूप में उन्होंने संघ द्वारा प्रतिपादित “पंच परिवर्तन” की अवधारणा को समाज के सामने रखा। उन्होंने इसके पांच मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

क्र.सं. पंच परिवर्तन के मुख्य स्तंभ समाज में इसका महत्व
परिवार प्रबोधन पारिवारिक मूल्यों को बचाना और नई पीढ़ी को संस्कारित करना।
पर्यावरण संरक्षण जल, जमीन और प्रकृति की रक्षा के लिए व्यक्तिगत प्रयास।
सामाजिक समरसता समाज से जातिवाद और छुआछूत मिटाकर सबको एक सूत्र में पिरोना।
स्वबोध अपनी गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और स्वदेशी के प्रति गौरव का भाव।
नागरिक कर्तव्य अधिकारों के साथ-साथ देश के प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजगता।

उन्होंने कहा कि यदि समाज इन पांच क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सामूहिक प्रयास करेगा, तो राष्ट्र जीवन में एक व्यापक और युगांतरकारी सुधार संभव होगा। उन्होंने याद दिलाया कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देने वाली हमारी भारतीय संस्कृति ही संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

स्वयंसेवक एक-एक गली सुधार दें तो भारत बदल जाएगा: भन्ते शील रतन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सदस्य एवं बुद्धिस्ट सोसायटी फ़ार अंजू एंड सोशल वेलफेयर (लखनऊ) के अध्यक्ष भन्ते श्री शील रतन जी ने भी स्वयंसेवकों में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य का महत्व बताते हुए कहा कि यदि शरीर स्वस्थ होता है, तो मन भी स्वतः ही प्रसन्न और स्वस्थ रहता है।

भन्ते जी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा:

“भारत पहले भी विश्व गुरु था और आगे भी रहेगा। राष्ट्र और समाज में परिवर्तन लाना कोई एक दिन का काम नहीं है। यह एक निरंतर चलने वाली साधना है। यदि संघ का एक-एक स्वयंसेवक संकल्प लेकर अपने घर और अपनी गली को बेहतर बना दे, तो पूरा भारत अपने आप बदल जाएगा।”

स्वावलंबन और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण

बीते 22 मई से चल रहे इस सघन प्रशिक्षण वर्ग का शनिवार को औपचारिक समापन हो गया, जिसके बाद अवध प्रांत के विभिन्न जिलों से आए शिक्षार्थी अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगे। यह वर्ग स्वावलंबन और समाज के सहयोग की एक बेजोड़ मिसाल रहा, जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • शिक्षार्थियों की कुल संख्या: इस वर्ग में अवध प्रांत के २६ जिलों के १६९ खंडों/नगरों के २८१ स्थानों से कुल ३३४ शिक्षार्थियों ने भाग लिया।

  • शैक्षणिक विविधता: प्रशिक्षणार्थियों में २४ परास्नातक (Post Graduates), ६४ स्नातक (Graduates), १२ शिक्षक और १९२ इंटरमीडिएट के छात्र शामिल थे।

  • स्वयं का व्यय भार: संघ की परंपरा के अनुसार, अलग-अलग आयु वर्ग के इन सभी शिक्षार्थियों ने वर्ग का शुल्क, अपनी गणवेश (यूनिफॉर्म) तथा अपने निवास से वर्ग स्थल तक आने-जाने का संपूर्ण व्यय खुद वहन किया।

  • रोटी संग्रह (अनूठी सामाजिक पहल): वर्ग में समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और नगरवासियों द्वारा प्रतिदिन दोनों समय परिवारों से २०-२० रोटियों का संग्रह किया गया। इस पूरे वर्ग के दौरान समाज की ओर से कुल १,२०,००० रोटियों का संग्रह कर स्वयंसेवकों के भोजन की व्यवस्था की गई, जो संघ के प्रति समाज के अगाध स्नेह को दर्शाता है।

प्रबुद्ध जनों और संघ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस भव्य समापन समारोह के अवसर पर संघ के कई वरिष्ठ अधिकारी, पदाधिकारी और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। मंच पर और कार्यक्रम में प्रमुख रूप से:

अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख नवल जी, वर्ग के सर्वाधिकारी प्रमोद जी, वर्ग कार्यवाह कृष्ण कुमार जी, सर्व व्यवस्था प्रमुख लालता प्रसाद जी, सह व्यवस्था प्रमुख सुशील जी, प्रान्त प्रचारक कौशल जी, सह प्रांत प्रचारक संजय जी, प्रांत प्रचारक प्रमुख यशोदा नन्द जी, सह प्रांत कार्यवाह संजय जी, डॉ. अविनाश जी, सम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह जी, प्रान्त प्रचार प्रमुख डॉ. अशोक दुबे, और सामाजिक समरसता प्रमुख राज किशोर जी उपस्थित रहे।

इनके अलावा बड़ी संख्या में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षार्थी, नगर के स्वयंसेवक, मातृशक्ति तथा वर्ग को सफल बनाने में अपना योगदान देने वाले उन्नाव के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रभक्ति के संकल्प और कल्याण मंत्र के साथ हुआ।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *