पेपर लीक कानून हुआ और सख्त, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान लागू
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बनाए गए पेपर लीक रोधी संशोधन कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही संशोधित कानून लागू हो गया है, जिसमें पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कड़े दंड और त्वरित कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के तहत पेपर लीक के मामलों में दोषी पाए जाने पर 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही मामलों की जांच और सुनवाई के लिए समय-सीमा भी निर्धारित कर दी गई है।
लोकसभा से हंगामे के बीच हुआ था पारित
यह संशोधन विधेयक संसद में तीखी बहस और हंगामे के बीच लोकसभा से पारित हुआ था। विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि इसका उद्देश्य पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को समाप्त करना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि यह कानून परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्ती से रोक लगाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
नए कानून की प्रमुख बातें
1. फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएंगी। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा गया है।
2. सजा हुई दोगुनी से भी ज्यादा
पहले के कानून में दोषियों के लिए 3 से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान था। संशोधित कानून में इसे बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष कर दिया गया है।
3. जुर्माना बढ़कर ₹10 करोड़
पहले पेपर लीक मामलों में अधिकतम 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
4. स्पेशल टास्क फोर्स करेगी जांच
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया जाएगा। यह एजेंसी मामलों की जांच और नेटवर्क का खुलासा करने की जिम्मेदारी संभालेगी।
5. जांच पूरी करने की तय समय-सीमा
पहले जांच पूरी करने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं था। अब नए कानून के तहत दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा।
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास मजबूत करना भी है। सरकार का दावा है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट, समयबद्ध जांच और कड़े दंड के जरिए भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।