Umar Khalid Controversy: उमर खालिद को ‘नेशनलिस्ट’ बताकर कांग्रेस नेता ने खड़ा किया नया विवाद, NLSIU डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर भी बवाल
जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद को ‘नेशनलिस्ट’ बताने वाले कांग्रेस नेता और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के बयान से नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर विवाद चल रहा है।
बीके हरिप्रसाद से जब इस मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने ABVP की ओर से केंद्र सरकार को लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर खालिद को ‘नेशनलिस्ट’ बताया।
NLSIU में डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग को लेकर विवाद
दरअसल, NLSIU की ‘लॉ एंड सोसाइटी’ (LawSoc) कमिटी की ओर से 14 सितंबर को उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग आयोजित की जानी थी।
हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम को फिलहाल रद्द कर दिया गया। इसके पीछे लॉजिस्टिक और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया गया।
स्क्रीनिंग को लेकर विवाद बढ़ने के बाद यह मामला राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
ABVP ने केंद्रीय मंत्रियों को लिखा पत्र
प्रस्तावित स्क्रीनिंग के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की बेंगलुरु इकाई ने केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखा और कार्यक्रम को स्थायी रूप से रद्द करने की मांग की।
ABVP के विरोध के बाद 14 सितंबर को प्रस्तावित स्क्रीनिंग टाल दी गई।
इसी मामले में जब बीके हरिप्रसाद से ABVP के पत्र को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने संगठन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नाथूराम गोडसे के अनुयायियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उमर खालिद पर बोलने का अधिकार नहीं है।
इसके बाद कांग्रेस नेता ने कहा, “उमर खालिद नेशनलिस्ट है।”
JNU में भी उमर खालिद की किताब पर कार्यक्रम हुआ था रद्द
उमर खालिद से जुड़ा यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जब किसी विश्वविद्यालय में उनके बारे में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ हो।
इससे पहले अगस्त में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) प्रशासन ने उमर खालिद की किताब ‘Fractured Communities’ पर प्रस्तावित चर्चा के लिए SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी थी।
यह कार्यक्रम JNUSU की ओर से आदिवासी दिवस के मौके पर 10 अगस्त को आयोजित किया जाना था। कार्यक्रम का समय दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित था।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ऑडिटोरियम की बुकिंग के लिए जमा किए गए आवेदन में कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। संयुक्त रजिस्ट्रार की ओर से जारी रद्दीकरण पत्र को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन ने मंजूरी दी थी।
कार्यक्रम में कई वक्ताओं के शामिल होने की थी योजना
प्रस्तावित चर्चा में प्रो. प्रभु महापात्रा, प्रो. उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बानो ज्योत्स्ना लाहिड़ी समेत कई वक्ताओं के शामिल होने की योजना थी।
कार्यक्रम रद्द होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में इसे लेकर भी चर्चा हुई थी।
UAPA के तहत गिरफ्तार हुए थे उमर खालिद
उमर खालिद को सितंबर 2020 में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित साजिश के मामले में आरोपी बनाया गया है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही उनकी कानूनी स्थिति और उनसे जुड़े कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय परिसरों में अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
फिलहाल NLSIU में डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग को लेकर विवाद ने एक बार फिर उमर खालिद से जुड़े राजनीतिक और अकादमिक विमर्श को सुर्खियों में ला दिया है।