Wild Almond Benefits: नॉर्मल बादाम से अलग होता है जंगली बादाम, जानें सिरदर्द से लेकर गठिया तक में बताए जाने वाले फायदे
बादाम को आमतौर पर लोग भिगोकर, मिठाइयों में मिलाकर या अलग-अलग रेसिपी के जरिए खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य बादाम के अलावा जंगली बादाम भी पाया जाता है?
जंगली बादाम समुद्र तटीय क्षेत्रों में ऊंचाई वाले स्थानों पर पाया जाने वाला एक पेड़ है। इसके फल सामान्य बादाम से अलग दिखाई देते हैं। इसका फल कुछ चपटा, नुकीला और अंडाकार बताया जाता है। फल के किनारे लाल और बैंगनी रंग के हो सकते हैं तथा प्रत्येक फल में एक बीज होता है।
आयुर्वेद में जंगली बादाम का इस्तेमाल
आचार्य बाल कृष्ण के अनुसार, जंगली बादाम का इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। इसके फल, बीज, पत्तियों और छाल का अलग-अलग तरीके से प्रयोग किया जाता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इसे अम्ल, मधुर, कषाय, शीत और पित्तशामक गुणों वाला बताया गया है। कुछ पारंपरिक उपयोगों में इसे पाचन संबंधी समस्याओं, सिरदर्द और जोड़ों से जुड़ी तकलीफों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, इन पारंपरिक दावों को आधुनिक चिकित्सा में किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
जंगली बादाम के बताए जाने वाले फायदे
सिरदर्द में इस्तेमाल
आयुर्वेदिक और पारंपरिक उपचार में जंगली बादाम की पत्तियों का इस्तेमाल सिरदर्द के लिए बताया जाता है। इसके पत्तों के रस का अलग-अलग तरीकों से उपयोग करने की बात कही जाती है। कुछ पारंपरिक नुस्खों में इसकी गिरी को सरसों के तेल के साथ पीसकर सिर पर लगाने का भी उल्लेख मिलता है।
हालांकि, नाक में किसी पौधे का रस डालना बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे जलन या अन्य समस्या हो सकती है।
दस्त और पेट की परेशानी
जंगली बादाम की पत्तियों और छाल में टैनिन पाए जाने का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक चिकित्सा में इनका इस्तेमाल दस्त जैसी समस्या में किया जाता है।
लेकिन दस्त के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसलिए केवल घरेलू या आयुर्वेदिक नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
गठिया और जोड़ों के दर्द में
जंगली बादाम की पत्तियों को पीसकर जोड़ों पर लगाने का इस्तेमाल पारंपरिक उपचार में बताया गया है। इसे गठिया और जोड़ों के दर्द में राहत से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, गठिया कई प्रकार का हो सकता है और इसके सही इलाज के लिए कारण की पहचान जरूरी है। इसलिए लगातार रहने वाले जोड़ों के दर्द में चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
बुखार में इस्तेमाल
पारंपरिक चिकित्सा में जंगली बादाम के तने की छाल से काढ़ा तैयार करने का उल्लेख मिलता है। इसे बुखार में राहत के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात कही जाती है।
लेकिन बुखार किसी संक्रमण या अन्य बीमारी का लक्षण हो सकता है, इसलिए सिर्फ जंगली बादाम के काढ़े को इलाज मानना सही नहीं है। खासकर तेज या लगातार बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
जंगली बादाम का इस्तेमाल कैसे करें?
आयुर्वेद में जंगली बादाम के पेड़ के अलग-अलग हिस्सों का विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल बताया गया है। लेकिन इसकी सही मात्रा और सेवन का तरीका व्यक्ति की स्थिति और इस्तेमाल किए जा रहे हिस्से पर निर्भर कर सकता है।
इसलिए अगर आप जंगली बादाम का इस्तेमाल किसी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के लिए करना चाहते हैं, तो खुद से सेवन या नुस्खा अपनाने के बजाय योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से सलाह लें।
Disclaimer: यह लेख पारंपरिक/आयुर्वेदिक उपयोगों की जानकारी पर आधारित है। इसे किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर की सलाह का विकल्प न समझें। किसी भी हर्बल या आयुर्वेदिक चीज का इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना सुरक्षित है।