• April 29, 2026

नफरती भाषण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मौजूदा कानून पर्याप्त, नए कानून बनाना विधायिका का काम

Supreme Court of India ने नफरती भाषण (हेट स्पीच) से जुड़े मामलों पर बुधवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए मौजूदा आपराधिक कानून पर्याप्त हैं और अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि नफरती भाषण से निपटने के लिए देश में कोई कानून नहीं है।

पीठ ने कहा कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों के मद्देनजर नए कानून बनाना या मौजूदा कानूनों में संशोधन करना केंद्र सरकार और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि Law Commission of India की मार्च 2017 की 267वीं रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर विचार किया जा सकता है।

फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि नफरती भाषण और अफवाह फैलाने जैसे मुद्दे भाईचारे, गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था के संरक्षण से सीधे जुड़े हुए हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगे गए विशेष निर्देश जारी नहीं करेगी।

पीठ ने दोहराया कि अदालतें कानून नहीं बना सकतीं। अपराध की परिभाषा तय करना और उसके लिए दंड निर्धारित करना पूरी तरह से विधायिका का अधिकार है। अदालत ने कहा कि संवैधानिक न्यायालय कानून की व्याख्या कर सकते हैं और मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए निर्देश दे सकते हैं, लेकिन वे नए कानून बनाने या सरकार को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा आपराधिक कानूनों का ढांचा—जिसमें Indian Penal Code के प्रावधान शामिल हैं—नफरती भाषण, धार्मिक भावनाएं आहत करने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (बीएनएसएस) और पूर्ववर्ती सीआरपीसी के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं।

पीठ ने कहा कि संज्ञेय अपराध सामने आने पर प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो संबंधित कानूनों में इसके खिलाफ प्रभावी उपाय भी उपलब्ध हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में विस्तृत आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

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