राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामला: टिन्नू यादव समेत 8 आरोपियों के घर छापेमारी, 79.85 लाख रुपये बरामद
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान आरोपियों के परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही उनकी संपत्तियों, बैंकिंग रिकॉर्ड और घरों से मिले दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। इस मामले में पुलिस किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। जिन आरोपियों के यहां छापेमारी की गई, उनमें रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और कमलेश पांडे सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंदानंद सरस्वती ने भी चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े विवाद पर अपना पक्ष रखने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की घोषणा की है।
ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी सदस्यों से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बदलाव को लेकर सुझाव मांगे गए हैं। 11 जुलाई को अयोध्या में प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर निर्णय के साथ-साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव पर भी चर्चा होगी। प्रस्तावित बदलावों के तहत चढ़ावे की गिनती, प्रबंधन और लेखा-जोखा की जिम्मेदारी चार्टर्ड अकाउंटेंट, पूर्व बैंक अधिकारियों और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को सौंपे जाने की तैयारी है। इसके अलावा सचिव और सीईओ जैसे प्रमुख पदों पर भी नियुक्तियां किए जाने की संभावना है।
एसआईटी जांच में सामने आईं कई खामियां
विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच में चढ़ावे के प्रबंधन में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच के बाद नकदी और बहुमूल्य चढ़ावे की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, नकदी गिनती के दौरान निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया। सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की तलाशी और सीसीटीवी निगरानी जैसे कई नियमों में लापरवाही सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पूर्व चालक रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास कई दानपात्रों (हुंडियों) की चाबियां थीं। आरोप है कि इसी व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर चढ़ावे की नकदी में अनियमितता की गई। हालांकि, गबन किस तरीके से किया गया और कुल कितनी राशि प्रभावित हुई, इसकी जांच अभी जारी है। एसआईटी ने यह भी पाया कि चढ़ावे की गिनती से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को निर्धारित 180 दिनों के बजाय केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा गया। वहीं, जांच में यह भी सामने आया कि चढ़ावा गिनती के प्रभारी रहे आरोपी सुभाष श्रीवास्तव की नियुक्ति ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की सिफारिश पर की गई थी। गौरतलब है कि यह मामला सात जून को उस समय चर्चा में आया था, जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का आरोप लगाया था। हालांकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि आंतरिक ऑडिट में किसी बड़ी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।