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जब नूतन बनीं ‘कालीगंज की बहू’: बिमल मित्र के उपन्यास पर आधारित था दूरदर्शन का चर्चित सीरियल ‘मुजरिम हाजिर’

नई दिल्ली: 1980 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिकों ने भारतीय दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई थी। इन्हीं यादगार धारावाहिकों में एक नाम था ‘मुजरिम हाजिर’ का, जो प्रसिद्ध साहित्यकार बिमल मित्र के चर्चित उपन्यास ‘आसामी हाजिर’ पर आधारित था। दमदार कहानी, सामाजिक सरोकारों और बेहतरीन अभिनय के चलते यह सीरियल उस दौर के लोकप्रिय कार्यक्रमों में शामिल रहा। साल 1988 में प्रसारित हुए इस धारावाहिक का निर्देशन राकेश चौधरी ने किया था, जबकि इसका निर्माण संवाद वीडियो प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया था। लेखक मीर मुनीर ने बिमल मित्र के उपन्यास को छोटे पर्दे के लिए रूपांतरित किया था। सीरियल की कहानी समाज, रिश्तों और मानवीय भावनाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। इस धारावाहिक की सबसे बड़ी खासियत हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नूतन थीं, जिन्होंने इसमें ‘कालीगंज की बहू’ का किरदार निभाया था। अपने सहज और प्रभावशाली अभिनय से नूतन ने इस भूमिका को जीवंत बना दिया। उनके किरदार में भावनात्मक गहराई और सादगी का ऐसा मेल था कि दर्शकों ने इसे खूब सराहा। ‘मुजरिम हाजिर’ की स्टारकास्ट भी बेहद मजबूत थी। इसमें उत्पल दत्त, रीता भादुड़ी, राजीव वर्मा, मंगल ढिल्लों, वीरेंद्र सिंह, अजीत वचानी, मोहन भंडारी, अंजन श्रीवास्तव और शशि पुरी जैसे अनुभवी कलाकार नजर आए थे। वहीं अभिनेत्री नवनी परिहार ने इसी धारावाहिक से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने शो में नयनतारा का किरदार निभाया था। धारावाहिक की लोकप्रियता में इसके संगीत का भी अहम योगदान रहा। शो में इस्तेमाल किया गया गीत ‘गुन गुना’ दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। यह गीत बिमल मित्र की रचना ‘पालकीर गान’ से प्रेरित था। जब भी नूतन का किरदार पालकी में दिखाई देता, यह धुन सुनाई देती थी। धीरे-धीरे यह गीत शो की पहचान बन गया। ‘मुजरिम हाजिर’ को आज भी दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर के यादगार धारावाहिकों में गिना जाता है। खास बात यह है कि यह नूतन के करियर का आखिरी टेलीविजन प्रोजेक्ट भी था। इस धारावाहिक के कुछ समय बाद उनका निधन हो गया, लेकिन ‘कालीगंज की बहू’ के रूप में उनका अभिनय आज भी दर्शकों की यादों में जीवित है।

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