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दिल्ली में I-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई, फाउंडर वीनेश चंदेल गिरफ्तार

दिल्ली में Enforcement Directorate (ईडी) ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के डायरेक्टर और फाउंडर Vinesh Chandel को सोमवार शाम गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई है।

ईडी ने अपनी जांच Delhi Police द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और फर्जी अकाउंटिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या है मामला?

ईडी के अनुसार, I-PAC अपने डायरेक्टर्स—वीनेश चंदेल, ऋषि राज सिंह और अन्य सहयोगियों के माध्यम से कथित रूप से अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को उत्पन्न करने, छिपाने और उसे वैध दिखाने के संगठित प्रयास में शामिल थी। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी ने जटिल वित्तीय लेन-देन के जरिए काले धन को सफेद बनाने का नेटवर्क तैयार किया था।

जांच में सामने आया मोडस ऑपरेंडी

जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी भुगतान को दो हिस्सों में स्वीकार करती थी—एक हिस्सा बैंकिंग चैनलों (चेक/ऑनलाइन) के जरिए और दूसरा नकद या गैर-बैंकिंग माध्यम से। दस्तावेजों में “50% चेक” जैसी एंट्रियों से संकेत मिलता है कि आधा भुगतान आधिकारिक रूप से और बाकी कैश में लिया जाता था।

ईडी का आरोप है कि I-PAC ने कई फर्जी बिल (बोगस इनवॉइस) तैयार किए, ताकि बिना किसी वास्तविक सेवा के प्राप्त धन को वैध ठहराया जा सके। इन ट्रांजैक्शन्स के जरिए अवैध धन को कई परतों में घुमाकर सिस्टम में वैध आय के रूप में शामिल किया गया।

हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल का शक

जांच एजेंसी ने कोर्ट में बताया कि कंपनी के खातों में कई ऐसी एंट्रियां मिली हैं, जिनका कोई वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था। इससे यह संकेत मिलता है कि I-PAC कथित तौर पर एक “कंड्यूट” के रूप में काम कर रही थी, यानी पैसे को इधर-उधर घुमाने का माध्यम।

ईडी को यह भी संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया। PMLA के तहत दर्ज बयानों में सामने आया है कि कंपनी से जुड़े कुछ लोग हवाला ट्रांजैक्शन्स में मदद कर रहे थे।

ईडी के आरोप और आगे की कार्रवाई

ईडी ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान वीनेश चंदेल ने भ्रामक जानकारी दी और कैश ट्रांजैक्शन्स से इनकार किया। एजेंसी का यह भी दावा है कि सबूत मिटाने के लिए कंपनी के कर्मचारियों के अकाउंट्स से ईमेल और वित्तीय डेटा डिलीट करवाया गया।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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