अखिलेश यादव का लखनऊ मेयर पर तंज: ‘महापौर का सदा महादौर नहीं होता’, हाई कोर्ट ने सीज किए अधिकार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने लखनऊ की महापौर Sushma Kharkwal पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “महापौर का सदा महादौर नहीं होता… न्याय हुआ।” माना जा रहा है कि यह टिप्पणी हाल ही में लखनऊ मेयर के खिलाफ आए न्यायालय के आदेश को लेकर की गई है।
यह विवाद उस समय बढ़ा था जब मेयर सुषमा खर्कवाल द्वारा अखिलेश यादव की मां को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
हाई कोर्ट ने मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार किए सीज
जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आदेश का पालन न करने पर लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना के मामले में की गई।
मामला वॉर्ड-73 फैजुल्लागंज से जुड़ा है, जहां पूर्व पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द होने के बाद चुनाव न्यायाधिकरण/सत्र न्यायालय ने 19 दिसंबर 2025 को ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित किया था। लेकिन आरोप है कि करीब पांच महीने तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई।
इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां निर्वाचित पार्षद को शपथ दिलाने का निर्देश जारी किया गया। हालांकि, आदेश का अनुपालन न होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मेयर के अधिकारों पर रोक लगा दी। पार्षद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने अदालत में पक्ष रखा।
भाजपा सरकार पर भी बरसे अखिलेश यादव
इससे पहले, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने ‘पीडीए ऑडिट’ और ‘आरक्षण की लूट’ नामक दस्तावेज जारी किया।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में किसी एक दल की नहीं, बल्कि ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की सरकार बनेगी। उन्होंने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का माध्यम बताते हुए कहा कि सरकार को बुलडोजर का इस्तेमाल “असमानता की जमीन समतल करने” और सभी को उनका उचित आरक्षण देने के लिए करना चाहिए।