मानसून सत्र में सरकार के दो बड़े बिलों को समर्थन दे सकती है NCP-SP, पार्टी में टूट की अटकलों के बीच नई रणनीति
नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इस बीच, विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SP केंद्र सरकार के दो अहम विधेयकों—महिला आरक्षण बिल और डीलिमिटेशन (परिसीमन) संशोधन विधेयक—का समर्थन कर सकती है।
लोकसभा में NCP-SP के आठ सांसद हैं और पार्टी के संभावित समर्थन को संसद के आगामी सत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
NDA में शामिल हुए बिना समर्थन की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का समर्थन करने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर एक धड़ा केंद्र सरकार के साथ जाने की वकालत कर रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व संगठन में संभावित असंतोष और टूट की आशंकाओं को देखते हुए सीमित मुद्दों पर समर्थन की रणनीति अपना सकता है।
डीलिमिटेशन बिल पर क्या है पार्टी का रुख?
सूत्रों के अनुसार, यदि डीलिमिटेशन संशोधन विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव शामिल होता है, तो NCP-SP इस विधेयक का समर्थन कर सकती है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई एक सर्वदलीय बैठक में इस तरह के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस विचार पर केवल NCP-SP ही नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और डीएमके ने भी सहमति जताई है।
पार्टी में टूट की अटकलें तेज
हाल के दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल की चर्चाएं तेज हुई हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में हाल ही में छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब NCP-SP में भी संभावित टूट की अटकलें लगाई जा रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ विधायक और सांसद भी पाला बदल सकते हैं, हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
NCP में पहले भी हो चुकी है बड़ी टूट
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार को अपने लंबे राजनीतिक सफर में कई बड़े राजनीतिक संकटों का सामना करना पड़ा है।
सबसे बड़ी टूट 2 जुलाई 2023 को हुई थी, जब उनके भतीजे अजित पवार ने बगावत कर दी थी। अजित पवार अधिकांश विधायकों को अपने साथ लेकर महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे।
बाद में चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को ही असली NCP के रूप में मान्यता दी और पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ उन्हें आवंटित कर दिया। इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को नई पहचान के साथ NCP-SP के रूप में काम करना पड़ा और उसे नया चुनाव चिह्न ‘तुरहा बजाता हुआ व्यक्ति’ मिला।
2019 में भी हुई थी बगावत की कोशिश
इससे पहले नवंबर 2019 में भी अजित पवार ने अचानक देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राजनीतिक हलचल मचा दी थी। हालांकि, उस समय शरद पवार ने करीब 80 घंटे के भीतर स्थिति को संभाल लिया था और पार्टी को टूटने से बचा लिया था।
गौरतलब है कि खुद शरद पवार ने 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना की थी। लेकिन 2023 की बड़ी राजनीतिक टूट के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई और अब शरद पवार का गुट NCP-SP के नाम से काम कर रहा है।
इस बीच, मानसून सत्र में केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विधेयकों पर NCP-SP के संभावित रुख को महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति, दोनों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।